संतोष राज पाण्डेय,स्थानीय संपादक
काठमांडू
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच एक बार फिर “भारतीय मीडिया” को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर #GoHomeIndianMedia फिर ट्रेंड में है। लेकिन ये पहली बार नहीं है।

किरकिरी के 3 बड़े कारण:
1. 2015 भूकंप वाला इतिहास – सनसनीखेज कवरेज का आरोप:
2015 में नेपाल भूकंप के दौरान भारतीय चैनलों पर आरोप लगा था कि उन्होंने पीड़ितों के दर्द से ज्यादा TRP पर ध्यान दिया। नेपाल सरकार और स्थानीय लोगों का कहना था कि भारतीय मीडिया ने सिर्फ भारतीय सेना और NDRF की तारीफ दिखाई, जबकि नेपाली सेना और स्थानीय लोगों के बचाव कार्य को कम दिखाया। तब ट्विटर पर #GoHomeIndianMedia टॉप ट्रेंड बना था। 783e
2. 2020 में नक्शा विवाद और चैनलों पर बैन:
भारत-नेपाल के बीच लिपुलेख-कालापानी नक्शा विवाद के दौरान कुछ भारतीय निजी चैनलों ने नेपाल के PM KP Sharma Oli और नेपाल में चीन की राजदूत के बारे में अपमानजनक खबरें दिखाई थीं। इसके बाद नेपाल के केबल ऑपरेटरों ने दूरदर्शन को छोड़कर सभी भारतीय प्राइवेट न्यूज चैनलों का प्रसारण बंद कर दिया था। नेपाल सरकार ने कहा था कि ऐसी फर्जी और अपमानजनक खबरों से दोनों देशों के रिश्ते खराब होंगे।

3. अभी की बाढ़ (2025-26) में क्या हुआ?
NDRRMA की रिपोर्ट के बाद भारतीय मीडिया की बड़ी टीम काठमांडू पहुंची। आरोप फिर वही है:
- एयरपोर्ट पर भारतीय मीडिया के लिए स्पेशल व्यवस्था से राहत सामग्री में देरी
- लापता भारतीयों (करीब 300 भारतीयों से संपर्क टूटा) की खबर को नेपाल की त्रासदी से ज्यादा तूल देना
- स्थानीय लोगों से असंवेदनशील सवाल पूछना
इसी कारण नेपाल में प्रेस काउंसिल और फेडरेशन ऑफ नेपाली जर्नलिस्ट्स ने पहले भी भारतीय मीडिया की रिपोर्टिंग पर आपत्ति जताई थी।
निष्कर्ष: नेपाल के लोग भारतीय मदद का सम्मान करते हैं, लेकिन मीडिया की सनसनीखेज और एकतरफा रिपोर्टिंग से नाराज होते हैं।








