पटना
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को लेकर बिहार की सियासत में बवाल शुरू हो गया है. ममता बनर्जी के बिहार के लोगों पर दिए एक बयान ने बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया है. ममता बनर्जी ने बुधवार को बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा था, ‘बिहारी लोगों के नाम पश्चिम बंगाल के वोटर लिस्ट में जोड़ा जा रहा है. जो काम बीजेपी ने महाराष्ट्र और दिल्ली में किया, वही काम अब बंगाल में शुरू हो गया है. लेकिन, ये बंगाल है हम नहीं होने देंगे.’ ममता बनर्जी के इस बयान के बाद जेडीयू ने आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव और तेजस्वी यादव को घेरते हुए बड़ा आरोप लगाया है. वहीं, आरजेडी ने ममता बनर्जी के बयान का बचाव किया है.




अभी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बांग्लादेशी नेताओं के भड़काऊ बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देकर बिहार, बंगाल और ओडिशा के लोगों को दिल जीत लिया था. कुछ महीने पहले बांग्लादेश के नेताओं ने बंगाल, ओडिशा और बिहार पर दावा ठोक दिया था. तब ममता ने कहा था, ‘आप कब्जा करने आएंगे और हम लॉलीपॉप खाते रहेंगे. ये बात सोचना भी मत.’ ममता के इस बयान की खूब तारीफ हुई थी. लेकिन, उसी ममता ने बिहारियों को लेकर एक बार फिर से नफरत वाला बयान देकर बिहारियों को बड़ा दर्द दिया है. ऐसे में ममता बनर्जी का यह बयान दिल्ली चुनाव में अरविंद केजरीवाल की पार्टी आम आदमी पार्टी की हार और आगामी बंगाल चुनाव से तो नहीं जुड़ा है?
ममता बनर्जी के बयान पर बिहार में महाभारतजेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ममता बनर्जी के बिहारी वोटर वाले बयान पर न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, ‘ममता बनर्जी पहले भी बाहरी लोगों के सवाल पर काफी आक्रामक रही हैं. ममता जी कई बार अप्रत्यक्ष तरीके से बिहारी और बाहरी लोगों पर आरोप लगाती रही हैं. बीते बंगाल चुनाव में भी उन्होंने कहा था कि बिहार और यूपी के लोग बड़ी संख्या में बंगाल आ गए हैं. कमोबेश ममता बनर्जी का ताजा बयान दिल्ली चुनाव से ठीक पहले अरविंद केजरीवाल के दिए बयान जैसा ही है. केजरीवाल ने भी कहा था कि यूपी-बिहार के लोगों को बीजेपी वोटर लिस्ट में नाम जुड़वा रही है. केजरीवाल को उसकी कीमत चुकानी पड़ी. दिल्ली में आप की हार से भी ममता दीदी ने सीख नहीं ली और उन्होंने फिर से वही गलती दोहरा दी है.’

जेडीयू-आरजेडी आमने सामनेरंजन आगे कहते हैं, ‘बिहार भी अविभाजित बंगाल का हिस्सा रहा है. बिहार के लोगों की कई पीढ़ियां बंगाल में 100-200 सालों से रह रही हैं. ऐसे में उनको लेकर ममता बनर्जी का बयान उनकी बिहार के प्रति सोच को दर्शाता है. ऐसे में राजद और कांग्रेस की दोहरा चरित्र भी एक बार फिर से बेनकाब हो गया. अगर बिहार को लेकर इतने अपमानजनक शब्दों का प्रयोग ममता बनर्जी ने किया तो लालू यादव और तेजस्वी यादव क्यों चुप हैं? लालू जी और तेजस्वी जी को एक बिहारी होने के नाते त्वरित टिप्पणी करनी चाहिए थी. एक राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते कांग्रेस को भी अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए थी. लेकिन, इन नेताओं के बयान इसलिए नहीं आए हैं कि ममता दीदी कहीं उनसे नाराज न हो जाएं. दरअसल, आरजेडी औऱ कांग्रेस को बिहार और बिहारियों से मतलब नहीं है, बल्कि खुद की राजनीति चमकाने के लिए ये इंडिया गठबंधन के साथियों का इस्तेमाल करते हैं. जब उनके पक्ष में बाते होती हैं तो तब तो ठीक है , लेकिन जैसे ही किसी राज्य या किसी प्रांत को गालियां दी जाती हैं तो ये लोग चुप हो जाते हैं.’
वहीं, आरजेडी प्रवक्ता नवल किशोर राय ने ममता बनर्जी को बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘देखिए वोटर का बनाना और रिकार्ड रखने का काम इलेक्शन कमीशन का होता है. इलेक्शन कमीशन इसी के अंतगर्त काम करती है. ऐसे में कोई सरकार ये कहे कि हम ये नहीं करेंगे वो नहीं करेंगे ये हो नही सकता है. जहां तक ममता जी ने जो बात कही है वह किस संदर्भ में कही हैं इसको समझना जरूरी है. भारतीय जनता पार्टी जिस तरह से पूरे समाज में भेदभाव और नफरत फैला रही है. शायद उन्होंने इस बात की तरफ इंगित किया होगा. बीजेपी दिल्ली में अन्य प्रदेशों में लोगों के बीच तनाव और बिखराव पैदाकर वोट बटोरना चाहती है. जहां तक बिहारियों की बात है किसी भी राज्य के आर्थिक विकास में बिहारी लोगों की भूमिक अहम होती है. ऐसे में कोई भी इस तरह से कैसे बोल सकता है? ममता बनर्जी शायद भारतीय जनता पार्टी की राजनीति को खंडित और खिलाफत करने के लिए यह बात बोली होंगी.’









