पेरेंट्स होने के नाते आपको अपने बच्चे का उत्साह बढ़ाना चाहिए और उनकी सफलता पर तारीफ भी करनी चाहिए

स्टार इंडिया नाउ डेस्क

आमतौर पर देखा जाये तो बच्चा उन्हीं आदतों को सीखता है, जो वह देखता है. खासतौर पर छोटे बच्चे जिन्हें सही-गलत का पता नहीं होता, उनकी गलत आदतों का जिम्मेदार माता-पिता को ही माना जाता है. ऐसे में आपको बच्चों के सामने अच्छे से पेश आना चाहिए. बच्चों के सामने ऐसे काम नहीं करने चाहिए, जो कि उन पर बुरा असर करें. ऐसे में आज हम कुछ बुरी आदतों के बारे में बात करने वाले हैं, जो कि पेरेंट्स को भूलकर भी नहीं करना चाहिए.

बच्चों की बातों को गलत ठहराना 

अगर माता-पिता अपने बच्चे को बार-बार डांटते हैं, गलतियों पर जरुरत से ज्यादा ध्यान देते हैं, हर बात को गलत ठहराते है और उसकी तुलना दूसरों से करते हैं, तो यह बच्चे के आत्मविश्वास को कमजोर कर सकता है. जिससे उनका मानसिक विकास रुक सकता है और वे खुद को कमजोर महसूस करने लगते हैं. पेरेंट्स होने के नाते आपको अपने बच्चे का उत्साह बढ़ाना चाहिए और उनकी सफलता पर तारीफ भी करनी चाहिए, जिससे उनका आत्मसम्मान भी बढ़ेगा. 

ज्यादा समय तक न देखें मोबाइल

अगर माता-पिता खुद भी स्क्रीन के आदी हैं और बच्चों को भी मोबाइल, टीवी या टैबलेट पर ज्यादा समय बिताने देते हैं, तो इसका असर उनकी याददाश्त और एकाग्रता पर पड़ता है. इससे उनकी सोचने-समझने की क्षमता कमजोर होने का डर रहता है. ज्यादा समय तक मोबाइल या टीवी देखने से आंखें कम उम्र में खराब हो सकती हैं. इसलिए अपने बच्चो को कम से कम टीवी और मोबाइल का देखने को कहें. 

फास्ट फूड खाने से करें मना

आज कल मार्केट में कई प्रकार के फ्रोजेन फूड आ गए है, जिन्हे पेरेंट्स अपने बच्चो को खिलते है. जो स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है. संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर आहार न मिलने के कारण से बच्चों का मस्तिष्क सही से विकास नहीं कर पाता है और इससे उनकी दिमागी शक्ति कमजोर हो जाती है. इसलिए अपने बच्चो को संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर आहार जरूर से खिलाना चाहिए, जिससे वह शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से विकास कर सके. 

सोने-जागने का टाइम करें फिक्स

अगर माता-पिता अपने बच्चों के सोने-जागने के समय का ध्यान नहीं रखते है, तो उनके सोने और जागने का शेड्यूल बिगड़ सकता है. ऐसे में उनके सोने और जागने का टाइम फिक्स करें, क्योंकि ज्यादा देर तक सोने से याददाश्त कमजोर हो जाती है और पर्याप्त नींद न मिलने से दिमाग सही तरीके से काम नहीं करता है. इसके अलावा, किसी भी काम को करने में उनका मन नहीं लगता है. जिसके कारण उनके अंदर किसी भी नयी चीज को सीखने की इच्छा कम हो जाती है. इसलिए पैरेंट्स को अपने बच्चों के सोने और जागने के समय का खास ध्यान रखना चाहिए.  

बच्चों से बातचीत न करना

अगर माता-पिता अपने बच्चों से खुलकर बातचीत नहीं करते और उन्हें अपनी बातों को कहने का मौका नहीं मिलता है, जिससे बच्चे अपने पैरेंट्स से अपनी बातों को खुलकर नहीं कह पाते हैं और सहमे-सहमे रहने लगते हैं. बातचीत की कमी से उनका मानसिक विकास धीमा हो जाता है, उनके सोचने-समझने की क्षमता कम हो जाती है और समस्या सुलझाने की क्षमता भी प्रभावित हो जाती है. इस बात का ध्यान रखते हुए पैरेंट्स को अपने बच्चों से बात करनी चाहिए और उनकी बातों को सुनकर समझने की कोशिश करनी चाहिए. 

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