अनूप कुमार सिंह, पटना
बिहार की राजनीति में लंबे समय से हाशिए पर चल रहे सारण के भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूढ़ी की राजनीतिक वनवास अब समाप्त होने वाला है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले भाजपा द्वारा उन्हें एक बार फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दिए जाने की अटकलें जोरों पर हैं। यह फैसला भाजपा के लिए न केवल एक रणनीतिक कदम होगा, बल्कि बिहार में राजपूत समुदाय के असंतोष को दूर करने की दिशा में एक बड़ा मास्टर स्ट्रोक भी साबित हो सकता है।

राजनीतिक वनवास का अंत
2019 के लोकसभा चुनाव में सारण से जीतने के बावजूद राजीव प्रताप रूढ़ी को केंद्र में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। 2014 में केंद्रीय मंत्री बनने के बाद 2017 में जब मोदी सरकार ने मंत्रिमंडल में फेरबदल किया, तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। तब से लेकर अब तक वे भाजपा के राष्ट्रीय मंच पर साइडलाइन ही रहे। लेकिन अब 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में वापसी कराने की प्रबल संभावना बन रही है।
जातीय संतुलन साधने का दांव
भाजपा की राजनीति में जातीय समीकरणों की अहम भूमिका होती है। बिहार में राजपूत समुदाय भाजपा का मजबूत समर्थक रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में उन्हें संगठन और सरकार में अपेक्षित भागीदारी नहीं मिलने से असंतोष बढ़ा है। पहले राज्यसभा के माध्यम से आर. के. सिंह की एंट्री की तैयारी चल रही थी, फिर उन्हें बिहार का डिप्टी सीएम बनाने तक की चर्चाएं हुईं। लेकिन अंततः जातीय संतुलन के चलते यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। ऐसे में, राजपूत मतदाताओं को संतुष्ट करने और उनका भरोसा बनाए रखने के लिए भाजपा राजीव प्रताप रूढ़ी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने की रणनीति बना रही है।
राजीव प्रताप रूढ़ी की संभावित भूमिका
अगर उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलती है, तो इससे भाजपा को कई फायदे हो सकते हैं—
- राजपूत वोट बैंक का मजबूती से साधना – बिहार में राजपूत मतदाता करीब 5-6% हैं, जो भाजपा के कोर वोटर माने जाते हैं। रूढ़ी की वापसी से इस समुदाय में पार्टी की पकड़ और मजबूत होगी।
- बिहार भाजपा में आंतरिक संतुलन बनाना – हाल के दिनों में बिहार भाजपा में कई गुटबाजी की खबरें आई हैं। रूढ़ी जैसे अनुभवी नेता की सक्रिय भूमिका पार्टी को अंदरूनी एकजुटता देने में मदद करेगी।
- युवाओं और शहरी मतदाताओं को साधना – रूढ़ी की एक मजबूत प्रशासनिक छवि है और वे शहरी व पढ़े-लिखे मतदाताओं के बीच भी लोकप्रिय हैं। भाजपा इसका लाभ 2025 में लेना चाहेगी।
सारण से पटना तक बढ़ेगी सक्रियता
अगर राजीव प्रताप रूढ़ी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जाता है, तो इससे न केवल सारण क्षेत्र में भाजपा को फायदा होगा, बल्कि पूरे बिहार में पार्टी की पकड़ मजबूत होगी। रूढ़ी खुद एक ओजस्वी वक्ता और व्यवस्थित संगठनकर्ता हैं, जो भाजपा के लिए बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बड़े प्रचारक की भूमिका निभा सकते हैं।

भाजपा ने बिहार में हमेशा से जातीय समीकरणों के जरिए चुनावी बाजी खेली है। इस बार पार्टी को राजद और जदयू के महागठबंधन से कड़ी चुनौती मिल रही है। ऐसे में राजीव प्रताप रूढ़ी की केंद्रीय मंत्रिमंडल में वापसी पार्टी के लिए एक तगड़ा मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है। इससे राजपूत समुदाय का भाजपा से असंतोष दूर होगा और चुनावी रणनीति को नई धार मिलेगी।
अब देखना यह है कि भाजपा इस रणनीति को कब और किस रूप में लागू करती है, लेकिन एक बात तय है कि राजीव प्रताप रूढ़ी की वापसी बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।













