पथ निर्माण विभाग ने अपनाया एचएएम मॉडल को, गंगा किनारे 9960 करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी

बिहार में पुल और सड़क का निर्माण होगा एचएएम मॉडल पर


पटना, 15 जुलाई
राज्य में पुल और सड़क का निर्माण अब एचएएम (हाईब्रिड एन्युटी मेंटेनेंस) मॉडल पर किया जाएगा। कैबिनेट से इसकी मंजूरी मिलने के बाद मंगलवार को पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने विभाग में आयोजित प्रेस वार्ता में इस मॉडल से संबंधित विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिहार की आधारभूत संरचना को आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में विभाग की तरफ से लगातार निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि बिहार विधानसभा सत्र में राज्य में सड़क, पुल एवं एक्सप्रेस हाईवे के निर्माण के लिए एचएएम मॉडल को अपनाने की घोषणा की गई थी। इसके बाद राज्य सरकार की तरफ से वृहद इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए निविदा प्रक्रिया और कार्य योजना एचएएम मॉडल की शुरुआत की जा रही है। यह मॉडल खास तौर पर डिफर्ड पेमेंट सिस्टम पर आधारित है।
मंत्री ने बताया कि एचएएम मॉडल में परियोजना की निर्माण अवधि चार वर्षों की होती है, जबकि निर्माण के पश्चात 15 वर्षों तक उसका रख-रखाव संवेदक के जिम्मे होता है। चार वर्ष के निर्माण काल में सरकार द्वारा परियोजना लागत का मात्र 40% भुगतान किया जाएगा, जबकि शेष 60% राशि संवेदक स्वयं निवेश करेगा। इसके उपरांत 15 वर्षों तक सरकार द्वारा यह राशि ब्याज सहित संवेदक को चुकाई जाएगी। साथ ही संचालन एवं रखरखाव के लिए सरकार अलग से राशि भी देगी। यह एक प्रकार का पीपीपी मॉडल है।
एचएएम मॉडल के तहत टोल संग्रहण का अधिकार राज्य सरकार के पास रहता है और 15 वर्षों के रखरखाव पश्चात यह संपत्ति पुनः सरकार को हस्तांतरित की जाएगी। इसके अंतर्गत उन्हीं संवेदकों को कार्य मिलेगा जो तकनीकी मानकों पर खरे उतरते हैं और न्यूनतम लागत प्रस्तावित करते हैं।
मंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में सड़कों के 2047 विकसित बिहार के लक्ष्य के अनुरूप इसी मॉडल पर भारत सरकार की तर्ज पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप सड़कों का निर्माण कराये जाने की दिशा में पहला कदम जेपी गंगा पथ परियोजना के अंतर्गत दीघा से कोईलवर तक गंगा के किनारे एट-ग्रेड एवं एलिवेटेड सड़क निर्माण के लिए इसी मॉडल के तहत ठेका देने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। इसके अलावा, अब राज्य के मुंगेर जिले में साफियाबाद से बरियारपुर घोरघट होते हुए सुल्तानगंज और फिर भागलपुर होते हुए सबौर तक गंगा के किनारे 4 लेन एट-ग्रेड रोड एवं 4 लेन एलिवेटेड रोड का निर्माण भी इसी माडल के तहत किया जाएगा।
यह पूरी परियोजना दो खंडों में क्रियान्वित होगी
मंत्री ने बताया कि पहले खंड में मुंगेर के साफियाबाद से सुल्तानगंज तक कुल 42 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा। इसमें 29.25 किलोमीटर पैट ग्रेड (सड़क की ढलान) और 12.72 किलोमीटर एलिवेटेड सड़क शामिल है। इस खंड में 14 लघु वीयूपी, 13 वृहद वीयूपी, 2 टोल प्लाजा, 16 घाटों का उन्नयन और लगभग 5000 वर्ग मीटर क्षेत्र में विश्राम स्थल का निर्माण प्रस्तावित है। इस खंड की अनुमानित लागत 5120 करोड़ होगी।
दूसरे खंड में सुल्तानगंज से भागलपुर होते हुए सबौर तक 40.80 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी, जिसमें 26 किमी एट ग्रेड और 14.76 किमी एलिवेटेड सड़क शामिल है। इसमें 11 लघु वीयूपी, 16 वृहद वीयूपी, 1 टोल प्लाजा, 7 घाटों का उन्नयन, लगभग 2000 वर्ग मीटर में विश्राम स्थल और 2 स्पर का निर्माण किया जाएगा। इस खंड की अनुमानित लागत 4850 करोड़ आंकी गई है। दोनों खंडों को मिलाकर साफियाबाद से सबौर तक गंगा पथ परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 9 हजार 960 करोड़ रुपये होगी।
इस अवसर पर विभागीय सचिव संदीप कुमार आर. पुडकलकट्टी एवं विशेष सचिव शिर्षत कपिल अशोक ने बताया कि यह पथ बाढ़ के दौरान बांध की तरह कार्य करेगी। प्रमुख घाटों का विकास कर पर्यटन को बढ़ावा देने में यह सहायक होगा।

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