विकसित बिहार के सपने को साकार कर रहीं महिलाएं

संदीप भूषण

आर्थिक मामलों के जानकार, वरिष्ठ पत्रकार

सामाजिक संरचना और विकास की अवधारणा में महिला सहभाग का तर्क भले नया हो, पर भारत जैसे देश में महिला सामर्थ्य का इतिहास पहले से ही समृद्ध रहा है। यह और बात है कि आजादी से पूर्व और उसके बाद के वर्षों में इस सामर्थ्य को कमतर करके आंका गया। देश में बिहार जैसे सूबे के बारे में इतिहासकारों से लेकर समाज विज्ञानियों ने यह भूल की कि वे यहां की महिलाओं के दमखम को न देख सके और न समझ सके।

इस कारण आजादी के बाद दशकों तक बिहार के साथ यहां की सामाजिक छवि खराब की जाती रही। 2005 इस लिहाज से एक महत्वपूर्ण वर्ष है। इससे पहले और बाद प्रदेश में महिलाओं की स्थिति में एक बड़ा फर्क आया है। बिहार में इस गुलाबी बदलाव का श्रेय जाता है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को। उन्होंने पंचायत से लेकर पुलिस बल तक जहां महिला आरक्षण का एक साहसिक निर्णय लिया, वहीं महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मदद के जरिए प्रदेश महिला स्वावलंबन का एक सर्वथा नया अध्याय रचा गया। आज की तारीख में बिहार में कई ऐसी महिलाएं जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने शानदार सफलताएं अर्जित की हैं। बिहार की ये बेटियां जहां बदलते और आगे बढ़ते राज्य की छवि गढ़ रही हैं, वहीं उनके जरिए देश में महिला सशक्तीकरण के लिहाज से बिहार एक मॉडल स्टेट बनकर उभरा है। ऐसी महिलाओं से मिलना, उनसे बात करना एक ऐसे बिहार का साक्षात्कार है, जहां महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं हैं।

बिहार में नीतीश कैबिनेट के हालिया फैसले के बाद मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहारा देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके तहत प्रत्येक परिवार की एक महिला को पहली किस्त के रूप में 10-10 हजार रुपये सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए भेजे जाएंगे। यह राशि उन्हें रोजगार शुरू करने के लिए शुरुआती मदद के रूप में दी जा रही है। योजना के लाभार्थियों की प्रगति की समीक्षा करते हुए छह महीने बाद महिलाओं को दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना के अमल से जुड़ी बड़ी बात यह है कि 50 लाख महिलाओं के खाते में दस हजार रुपए सीधे ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू भी हो गई है।

नीतीश सरकार की सबसे सफल योजनाओं में जीविका विशेष स्थान रखती है। वर्ष 2006 में शुरू हुई इस योजना ने ग्रामीण महिलाओं को न केवल स्वरोजगार का अवसर दिया, बल्कि उन्हें नेतृत्व का अभ्यास भी कराया। आज राज्य में एक करोड़ 40 लाख से अधिक महिलाएं 11 लाख स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जीविका दीदी के रूप में पहचान बना चुकी हैं। ये महिलाएं सिलाई, बुनाई, कृषि, पशुपालन, किराना दुकान, मसाला निर्माण, मधुमक्खी पालन, बकरी पालन जैसे छोटे-छोटे उद्योगों के जरिए न केवल अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं।

स्वरोजगार के क्षेत्र में अब महिलाएं केवल पारंपरिक कार्यों तक सीमित नहीं रहीं। नीतीश सरकार ने महिलाओं को तकनीकी क्षेत्र में भी दक्ष बनाने के लिए ड्रोन दीदी योजना शुरू की है। इस योजना के तहत महिलाओं को ड्रोन खरीदने के लिए 80% यानी 8 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है, जबकि शेष दो लाख रुपये जीविका समूह के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राज्य सरकार की तरफ से महिलाओं के बीच ड्रोन वितरण के साथ उनके 15 दिवसीय निशुल्क ड्रोन पायलट प्रशिक्षण का भी प्रावधान किया गया है। यह योजना कृषि कार्यों में आधुनिक तकनीक का उपयोग कर स्वरोजगार को नई ऊंचाई देने का उदाहरण है।

स्वरोजगार की राह में सबसे बड़ी चुनौती होती है वित्तीय सहायता। नीतीश सरकार ने इस चुनौती का समाधान भी खोजा। सहरसा जिले की रमिया देवी द्वारा दिए गए सुझाव को मानते हुए सरकार ने महिला बैंक की स्थापना की दिशा में कदम बढ़ाया है। जिन जिलों में तीन लाख या उससे अधिक जीविका दीदियां हैं, वहां महिला बैंक खोले जाएंगे। ये बैंक केवल वित्तीय लेन-देन का माध्यम नहीं होंगे, बल्कि महिलाओं को सस्ती दरों पर ऋण, उद्यमिता सलाह और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराएंगे।

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