संतोष राज पाण्डेय
एक प्रधानमंत्री जब किसी राज्य की सांस्कृतिक वस्तु को धारण करता है और सार्वजनिक मंच पर लहराता है, तो यह महज़ सम्मान नहीं होता,बल्कि यह उस राज्य की जनता के प्रति यह भावनात्मक संदेश होता है कि “मैं आपकी संस्कृति के साथ हूं।”
यह एक शक्तिशाली राजनीतिक संकेत है, क्योंकि बिहार में गमछा आम आदमी का प्रतीक है, और उसे लहराना आम आदमी की भाषा में संवाद करने जैसा है।
NDA की नई राजनीतिक रणनीति का संकेत
बिहार की राजनीति वर्तमान में सामाजिक समीकरणों की सबसे नाज़ुक अवस्था से गुजर रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री का यह भाव NDA का बिहार में राजनीतिक आधार मज़बूत करने की कोशिश,सामाजिक न्याय के विमर्श को अपने पक्ष में मोड़ने का संकेत,और नीतीश कुमार के साथ संबंध की सार्वजनिक पुष्टि,इन तीनों की तरफ इशारा करता है।
नीतीश कुमार की छवि के साथ तालमेल
नीतीश कुमार स्वयं एक न्यूनतम आडंबर वाले, सरल पहनावे वाले, जमीन से जुड़े नेता माने जाते हैं। गमछा उनके राजनीतिक व्यक्तित्व का भी हिस्सा है। इसलिए, प्रधानमंत्री का गमछा लहराना यह संदेश भी देता है कि “हम नीतीश कुमार के नेतृत्व शैली और बिहार की सांस्कृतिक ज़मीन का सम्मान करते हैं।” यह एक सॉफ्ट, लेकिन असरदार राजनीतिक साझेदारी का प्रदर्शन है।
चुनावी संदर्भ में गमछे की राजनीति
बिहार में चुनावी राजनीति हमेशा प्रतीकों पर टिकी रही है;जैसे लालू का लाल कपड़ा, नीतीश का साधारण कुर्ता-पायजामा, बीजेपी का भगवा, वाम दलों का लाल झंडा। अब गमछा इस प्रतीक-संघर्ष का नया हिस्सा बन चुका है।
प्रधानमंत्री द्वारा गमछा लहराना बिहार के श्रम-आधारित समाज को सम्मान देने का संदेश,उत्तर भारतीय सांस्कृतिक पहचान की याद दिलाना,और आने वाले चुनावी समीकरणों में “भावनात्मक निवेश” का तरीक़ा है। बिहार में पहचान-आधारित राजनीति सबसे प्रभावी होती है। अगर पहचान के प्रतीक पर नियंत्रण मिल जाए, तो मतदाता मन पर भी नियंत्रण आसान हो जाता है।
आख़िरी बात
गमछा राजनीति का नया ‘लोक-संकेत’ है। बिहार का गमछा आज सिर्फ संस्कृति का प्रतीक नहीं, बल्कि राजनीतिक भाषा का भी सबसे असरदार शब्द बन गया है। प्रधानमंत्री द्वारा गमछे को लहराना इस बात का संकेत है कि केंद्रीय नेतृत्व अब बिहार की सांस्कृतिक संवेदनाओं को ज्यादा महत्व दे रहा है। यह दृश्य दो संदेश देता है:
पहला, सांस्कृतिक सम्मान का संदेश,यानी बिहार की पहचान को राष्ट्रीय राजनीति में जगह देना। और दूसरा,राजनीतिक रणनीति का संदेश,यानी भावनात्मक जुड़ाव के माध्यम से चुनावी लाभ प्राप्त करना।
सत्ताओं में परिवर्तन हो या गठबंधन बदले। बिहार का गमछा स्थायी है, क्योंकि यह बिहार की आत्मा का हिस्सा है।और राजनीति हमेशा वही सबसे मज़बूत प्रतीक चुनती है, जो सीधे जनता के दिल तक पहुंचते हैं।गमछा ऐसा ही एक प्रतीक है,क्योंकि यह सांस्कृतिक भी है, सामाजिक भी है, और अब राजनीतिक भी है।








