महाशिवरात्रि के दिन बेलपत्र अर्पित करने से विशेष कृपा मिलती है और धन से जुड़ी परेशानियां कम हो सकती हैं

आध्यात्मिक गुरु पंडित कमला पति त्रिपाठी

महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र पर्वों में से एक है. यह फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है. मान्यता है कि इसी रात भगवान शिव का प्राकट्य हुआ था और शिव-पार्वती का दिव्य मिलन भी इसी तिथि से जुड़ा माना जाता है. इसलिए इस दिन का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है. इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और सुबह से ही शिव मंदिरों में जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करते हैं. कई लोग दिनभर उपवास रखकर रात में शिव मंत्रों का जाप करते हैं. इस बार महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी 2026, रविवार को रखा जाएगा.

महाशिवरात्रि 2026 तिथि (Maha Shivratri 2026 Tithi)

द्रिक पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि इस बार 15 फरवरी की शाम 5 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा.

महाशिवरात्रि की रात यदि कोई जागकर प्रहर के अनुसार पूजा करना चाहता है, तो प्रहर का समय इस प्रकार रहेगा.

  • प्रथम प्रहर 15 फरवरी को शाम 6 बजकर 37 मिनट से शुरू होगा.
  • दूसरा प्रहर 15 फरवरी की रात 9 बजकर 45 मिनट से आरंभ होगा.
  • तीसरा प्रहर 15 फरवरी की मध्यरात्रि के बाद 12 बजकर 53 मिनट से शुरू होगा.
  • चौथा प्रहर 15 फरवरी की रात के बाद, 16 फरवरी की सुबह 4 बजे से प्रारंभ होगा यानी इसका समय सुबह 3 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा.

इन समयों के अनुसार आप प्रत्येक प्रहर में अलग-अलग पूजा, जप और अभिषेक कर सकते हैं. इसके बाद, अगले दिन निर्धारित समय में पारण किया जाता है.

महाशिवरात्रि 2026 का पारण कब किया जाएगा? (Maha Shivratri 2026 Paran Timings)

चूंकि, 15 फरवरी की रात महाशिवरात्रि की होगी, इसलिए पारण 16 फरवरी को किया जाएगा. 16 फरवरी को सुबह 6 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 24 मिनट तक पारण का समय रहेगा. आप इस अवधि के बीच कभी भी महाशिवरात्रि के व्रत का पारण कर सकते हैं.

महाशिवरात्रि 2026 निशीथ काल का समय

महाशिवरात्रि पर निशीथ काल 15 फरवरी की रात में, अर्थात 16 फरवरी की तिथि की शुरुआत में पड़ेगा. यानी इसका समय 16 फरवरी को रात 12 बजकर 09 मिनट से लेकर अर्धरात्रि 1 बजकर 01 मिनट तक रहेगा. यह अवधि पूजा, जप, अभिषेक और साधना के लिए सबसे श्रेष्ठ और शुभ मानी जाती है.

महाशिवरात्रि 2026 पूजन विधि (Maha Shivratri 2026 Pujan Vidhi)

महाशिवरात्रि के दिन सुबह से ही शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है. लोग जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा करते हैं. कई श्रद्धालु अपने घरों में भी रुद्राभिषेक कराते हैं और पूरे विधि-विधान से शिव परिवार की आराधना करते हैं. मान्यता है कि बेलपत्र अर्पित करने से विशेष कृपा मिलती है और धन से जुड़ी परेशानियां कम हो सकती हैं.

जो लोग मंदिर नहीं जा पाते, वे घर पर ही छोटा शिवलिंग स्थापित कर पूजा कर सकते हैं. शास्त्रों में बताया गया है कि घर के लिए बहुत बड़ा शिवलिंग नहीं रखना चाहिए. अंगूठे के ऊपरी हिस्से से बड़ा शिवलिंग घर में स्थापित करना उचित नहीं माना जाता. सोना, चांदी, पीतल, पत्थर या मिट्टी का शिवलिंग शुभ माना जाता है. स्फटिक और पारद का शिवलिंग भी घर में रखा जा सकता है, लेकिन स्टील, लोहे या एल्युमिनियम से बने शिवलिंग की पूजा से बचना चाहिए. शिवलिंग के साथ गणेश जी, माता पार्वती, कार्तिकेय और नंदी की छोटी प्रतिमा भी रखना शुभ माना जाता है.

करें इस मंत्र का जाप

पूजा के दौरान ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जप करना बहुत शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि इस मंत्र के जाप से डर और चिंता कम होती है और जीवन में शांति आती है. सच्चे मन से की गई शिव भक्ति महाशिवरात्रि को और भी फलदायी बना देती है.

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