आज विश्वकर्मा पूजा और कन्या संक्रांति का महासंयोग, सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी शिल्प के देवता की पूजा

आध्यात्मिक गुरु पंडित कमला पति त्रिपाठी जी

आज 17 सितंबर 2026, गुरुवार का दिन अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग लेकर आया है। आज संसार के प्रथम वास्तुकार, शिल्प कला के जनक और देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती है। साथ ही आज सूर्य देव सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे कन्या संक्रांति कहा जाता है।

मान्यता है कि कन्या संक्रांति के दिन ही ब्रह्मा जी के सातवें पुत्र भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। इसलिए हर वर्ष इसी दिन विश्वकर्मा पूजा की जाती है। इस दिन मशीनों, औजारों, कारखानों और निर्माण कार्यों से जुड़े यंत्रों की पूजा करने से व्यापार में वृद्धि, कार्य में कुशलता और समृद्धि आती है।

इस वर्ष इस पावन पर्व पर सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो समस्त कार्यों को सिद्ध करने वाला माना गया है।

आज के पंचांग का विस्तृत विवरण

तिथि: आज सुबह 10:48 बजे तक भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी, उसके बाद सप्तमी तिथि प्रारंभ।
वार: गुरुवार
पर्व: श्री विश्वकर्मा जयंती, कन्या संक्रांति, गुरुवार व्रत

नक्षत्र: शाम 07:53 बजे तक अनुराधा नक्षत्र, तत्पश्चात ज्येष्ठा नक्षत्र।
योग: दोपहर 12:49 बजे तक विष्कुम्भ योग, उसके बाद प्रीति योग।
करण: तैतिल (सुबह 10:48 तक), गर (रात्रि 11:52 तक), वणिज।

ग्रह गोचर – कन्या संक्रांति:
द्रिक पंचांग के अनुसार आज सुबह 07:58 बजे सूर्यदेव कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। इसी पुण्य काल में विश्वकर्मा पूजा सर्वोत्तम फलदायी होगी।

सूर्य और चंद्रमा का समय:
सूर्योदय – 06:17 AM | सूर्यास्त – 06:25 PM
चन्द्रोदय – 11:47 AM | चन्द्रास्त – 10:28 PM

पूजा के शुभ मुहूर्त

शुभ काल:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:41 से 05:29 बजे तक
  • अमृत काल: सुबह 08:23 से 10:09 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त (पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त): सुबह 11:57 से दोपहर 12:45 बजे तक
  • कन्या संक्रांति पुण्य काल: सुबह 07:58 से दोपहर 12:45 तक

अशुभ काल – ध्यान रखें:
राहुकाल – दोपहर 01:52 से 03:23 बजे तक
यम गण्ड – सुबह 06:17 से 07:48 बजे तक
दुर्मुहूर्त – सुबह 10:20 से 11:08 बजे तक और दोपहर 03:10 से 03:59 बजे तक

विश्वकर्मा पूजा विधि और सिद्ध मंत्र

आध्यात्मिक गुरु पंडित कमला पति त्रिपाठी जी के अनुसार, आज के दिन प्रातः स्नान कर कार्यस्थल, मशीनों और औजारों को स्वच्छ करें। उन पर हल्दी, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें।

पूजा के समय इन मंत्रों का जाप अवश्य करें:

1. प्रार्थना मंत्र:

ॐ आधार शक्तपे नम:।
ॐ कूर्माय नम:।
ॐ अनन्ताय नम:।
ॐ पृथिव्यै नम:।

2. विश्वकर्मा गायत्री मंत्र (कुशलता और व्यापार वृद्धि के लिए):

ॐ विश्वकर्मणे विद्महे, विश्वरूपाय धीमहि, तन्नो विश्वकर्मा प्रचोदयात्।

3. बीज मंत्र:

ॐ विश्वकर्मणे नमः।
इस मंत्र का 108 बार जाप करने से रुके हुए कार्य सिद्ध होते हैं और यंत्रों में आ रही बाधा दूर होती है।

गुरुवार होने से आज भगवान विष्णु और विश्वकर्मा जी दोनों की कृपा प्राप्त होगी। फैक्ट्री, दुकान, ऑफिस या वाहन की पूजा करके प्रसाद वितरित करना अत्यंत शुभ है।

सभी देशवासियों को STAR INDIA NOW परिवार की ओर से विश्वकर्मा पूजा और कन्या संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं।

नोट: यह पंचांग पारंपरिक वैदिक गणनाओं पर आधारित है। स्थान विशेष के अनुसार सूर्योदय-सूर्यास्त के समय में कुछ मिनटों का अंतर संभव है।

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