हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र शुरू, 20 अक्टूबर को विजयादशमी

आध्यात्मिक गुरु पंडित कमला पति त्रिपाठी

शारदीय नवरात्र 2026 को लेकर मिथिला और काशी दोनों क्षेत्रों में उत्साह चरम पर है। इस वर्ष माता दुर्गा का आगमन हाथी (गज) पर हो रहा है, जो शास्त्रों में अत्यधिक वर्षा, सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। विद्वानों के अनुसार इस बार तिथियों में कोई भ्रम नहीं है, इसलिए पूजा-अर्चना पूरी निष्ठा और नियम के साथ संपन्न होगी।

महालया के साथ ही उत्सव का माहौल शुरू हो जाएगा। इस बार मां का आगमन रविवार को और गमन मंगलवार को हो रहा है, जिसे सुख, सौभाग्य, आरोग्य, संतान सुख और धन-धान्य की परिपूर्णता के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

नवरात्र की प्रमुख तिथियां और शुभ मुहूर्त

11 अक्टूबर, रविवार से नवरात्र प्रारंभ: इसी दिन कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा होगी। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः 7:03 बजे से सूर्यास्त तक रहेगा। प्रथम मुहूर्त सुबह 6:31 से 11:00 बजे तक और विशेष अभिजीत मुहूर्त 11:35 से 12:23 बजे तक रहेगा।

12 अक्टूबर सोमवार: मां ब्रह्मचारिणी पूजन
13 अक्टूबर मंगलवार: मां चंद्रघंटा पूजन
14 अक्टूबर बुधवार: मां कूष्मांडा पूजन
15 अक्टूबर गुरुवार: मां स्कंदमाता पूजन
16 अक्टूबर शुक्रवार: मां कात्यायनी पूजन, इसी दिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक बिल्वाभिमंत्रण पूजन होगा।

17 अक्टूबर शनिवार – महासप्तमी: मां कालरात्रि पूजन, डोली यात्रा, नवपत्रिका प्रवेश, मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा और पट प्रदर्शन।

18 अक्टूबर रविवार – महाअष्टमी: मां महागौरी पूजन, कुमारी पूजन और रात्रि में महानिशा पूजन। महानिशा पूजन का समय रात 11:00 बजे से 1:30 बजे तक रहेगा।

19 अक्टूबर सोमवार – महानवमी: महानवमी व्रत पूजन और नवरात्र हवन। हवन 19 अक्टूबर सुबह 7 बजे से शुरू होकर 20 अक्टूबर सुबह 9:40 बजे पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा।

20 अक्टूबर को विजयादशमी पर एकमत नहीं, दो पंचांग – दो तिथियां

काशी पंचांग के अनुसार: 20 अक्टूबर मंगलवार को श्रवण नक्षत्र होने के कारण विजयादशमी मनाई जाएगी। इसी दिन दशमी पूजन, शमी पूजन, अपराजिता पूजन, जयंती ग्रहण, सरस्वती विसर्जन और देवी विसर्जन होगा। नौ दिन व्रत रखने वाले भक्त इसी दिन पारण करेंगे।

यह निर्णय आध्यात्मिक गुरु पं. कमलापति त्रिपाठी प्रमोद, गरीबनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पं. विनय पाठक, देवी मंदिर के प्रधान पुजारी डॉ. धर्मेंद्र तिवारी सहित संस्कृत उच्च विद्यालय अरेराज के पूर्व प्राचार्य पं. मिथिलेश दीक्षित, पं. सुनेता तिवारी, पं. नथुनी तिवारी, पं. ब्रजेंद्र ओझा, पं. धीरज झा धर्मेश समेत 30 से अधिक विद्वानों की संयुक्त मंत्रणा में लिया गया है।

मिथिला पंचांग के अनुसार: उदया तिथि के हिसाब से विजयादशमी 21 अक्टूबर बुधवार को मनाई जाएगी और कलश व प्रतिमा विसर्जन भी इसी दिन होगा।

आह्वान मंत्र

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