“जिज्ञासा से प्रश्न, प्रश्न से अनुसंधान और अनुसंधान से समाधान” : शिक्षा मंत्री
विज्ञान से नवाचार, नवाचार से विकसित बिहार: मिथिलेश तिवारी
पटना, 6 अक्टूबर।
शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी ने मंगलवार को राज्य विज्ञान संगोष्ठी–2026 में कहा कि विज्ञान केवल एक विषय नहीं, बल्कि सोचने, प्रश्न करने और समाधान खोजने की वैज्ञानिक पद्धति है।
राजधानी पटना में आयोजित संगोष्ठी का मुख्य विषय “भारतीय ऊर्जा परिदृश्य 2047: संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ” रहा। मंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक एवं आलोचनात्मक चिंतन विकसित करना और उन्हें अनुसंधान व नवाचार की दिशा में आगे बढ़ाना समय की जरूरत है।


उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का वर्ष है। ऊर्जा देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति की आधारशिला है। आने वाले वर्षों में बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के साथ ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की चुनौतियाँ सामने होंगी, जिनका समाधान युवा प्रतिभाओं की सोच और अनुसंधान से ही संभव है।
मंत्री ने भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था को पर्यावरण-अनुकूल, सस्ती, सुलभ और टिकाऊ बनाने पर जोर देते हुए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जैव ऊर्जा सहित स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में अनुसंधान को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने विद्यार्थियों में “ऊर्जा बचाएँ, भविष्य बचाएँ” की भावना विकसित करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर बिहार के विभिन्न प्रमंडलों से चयनित कक्षा 8 से 10 तक के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा और प्रस्तुतीकरण का प्रदर्शन किया। राज्य स्तर पर चयनित विद्यार्थी अब राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगे।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार में शिक्षा को केवल परीक्षा और प्रमाणपत्र तक सीमित न रखकर ज्ञान, कौशल, प्रयोग और नवाचार से जोड़ा जा रहा है। ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को समान अवसर देना सरकार की प्राथमिकता है।
अंत में उन्होंने विद्यार्थियों से कहा — “विज्ञान को केवल पढ़ें नहीं, विज्ञान को जीवन में उतारें।”








