पटना | STAR INDIA NOW
बिहार के शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लोकतंत्र को मजबूत करने और मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने की आवश्यक प्रक्रिया बताया है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित, अनुपस्थित और दोहरे पंजीकरण वाले मतदाताओं की पहचान करना तथा छूटे हुए पात्र नागरिकों के नाम जोड़ना देशहित और निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है।
श्री तिवारी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देश के लगभग 95 करोड़ मतदाताओं में से 82 करोड़ यानी करीब 88 फीसदी मतदाताओं ने गणना प्रपत्र भरकर अपनी जानकारी दर्ज कराई है। इस प्रक्रिया के दौरान लगभग 2.89 करोड़ मृत वोटरों और 1.01 करोड़ दोहरे पंजीकरण वाले मतदाताओं की पहचान की गई है, जबकि दो करोड़ से अधिक लोगों ने फॉर्म-6 के माध्यम से मतदाता सूची में अपना नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि देश में अबतक आठ बार 1952-56, 1957, 1961, 1965-66, 1983-84, 1987-89, 1992-95 और 2002-04 में एसआईआर हो चुका है, जिनमें से सात बार केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही है। तमिलनाडु और केरल में कांग्रेस गठबंधन के दल भी अपनी जीत में एसआईआर की भूमिका को स्वीकार कर चुके हैं। केरल के गृह मंत्री रहे रमेश चेन्नीथला ने माना था कि पहले सीपीएम फर्जी वोट डलवाती थी, जबकि कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी एसआईआर का समर्थन किया है।
श्री तिवारी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दल वोट चोरी का झूठा नैरेटिव फैलाकर चुनाव आयोग पर हमला कर रहे हैं ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों से लोगों का ध्यान भटकाया जा सके। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष यूपी में चुनाव हैं और परिवारवाद की प्रतीक कांग्रेस को करारी हार का भय सता रहा है। अखिलेश यादव की स्थिति तेजस्वी से भी बदतर होने वाली है और योगी जी की 10 वर्षों की सरकार इस बार फिर पूर्ण बहुमत से लौटेगी।
उन्होंने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य किसी पात्र मतदाता का अधिकार छीनना नहीं बल्कि अपात्र नामों को हटाकर वास्तविक मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है। यह प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के तहत चुनाव आयोग द्वारा संचालित की जाती है, इसलिए इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं बल्कि लोकतंत्र की मजबूती और जनादेश की विश्वसनीयता की दृष्टि से देखा जाना चाहिए।






