वरिष्ठ पत्रकार अनूप नारायण सिंह की विशेष रिपोर्ट
पटना
बिहार की राजनीति में एक नया चेहरा तेजी से उभर रहा है – पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा। अपनी कर्तव्यनिष्ठा, बेदाग छवि और दमदार नेतृत्व क्षमता के कारण वे राज्य के युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। बक्सर लोकसभा चुनाव 2024 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और अब 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जनसुराज’ से उनके जुड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
आनंद मिश्रा: एक जुझारू अधिकारी से जनसेवक तक का सफर
आनंद मिश्रा मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। वे 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं और असम-मेघालय कैडर में अपनी सेवा के दौरान ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के रूप में प्रसिद्ध हुए। असम में रहते हुए उन्होंने 150 से अधिक सफल एनकाउंटर ऑपरेशन किए, जिससे अपराधियों में उनका खौफ था और आम जनता में उनका सम्मान।
बिहार के युवा उनकी कार्यशैली से बहुत प्रभावित थे। वे एक ऐसे अधिकारी थे, जो जमीनी स्तर पर अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते थे। उनकी ईमानदारी, कठोर अनुशासन और जनहित में किए गए कार्यों ने उन्हें असम के लोगों के साथ-साथ बिहार के युवाओं के बीच भी लोकप्रिय बना दिया।
राजनीति में प्रवेश: भाजपा से दूरी और निर्दलीय लड़ाई
2023 में आनंद मिश्रा ने आईपीएस पद से इस्तीफा देकर राजनीति में प्रवेश किया। वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से उम्मीद कर रहे थे कि उन्हें बक्सर लोकसभा सीट से टिकट मिलेगा। उनका मानना था कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कहने पर उन्होंने नौकरी छोड़ी थी, जिन्होंने उन्हें भाजपा में बड़ी भूमिका देने का आश्वासन दिया था।
लेकिन भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया, जिससे वे निराश हुए। इसके बाद, उन्होंने स्वाभिमान और सिद्धांतों के साथ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में बक्सर से लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया। हालांकि वे चुनाव जीत नहीं पाए, लेकिन उन्होंने जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ और लोकप्रियता साबित कर दी।
युवाओं के लिए आइकन: नया नेतृत्व, नया भविष्य
बिहार में युवा वर्ग एक ऐसे नेता की तलाश में है जो बाहुबली राजनीति और जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर राज्य के विकास की बात करे। आनंद मिश्रा की छवि एक ईमानदार, तेजतर्रार और कर्मठ नेता की बन चुकी है, जो बिहार के युवाओं को नई दिशा दिखा सकते हैं।

वे अक्सर अपने भाषणों में युवाओं को आत्मनिर्भर बनने, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा देते हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव, निर्णय लेने की क्षमता और कानून व्यवस्था पर गहरी पकड़ उन्हें एक आदर्श जनसेवक बनाती है।
जनसुराज से जुड़ने की संभावनाएँ: बिहार विधानसभा चुनाव 2025
प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जनसुराज’ बिहार में नए नेतृत्व को तलाश रही है, जो भ्रष्टाचार और पुराने राजनीतिक ढांचे को चुनौती दे सके। आनंद मिश्रा की साफ-सुथरी छवि और जनसेवा का जुनून उन्हें 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जनसुराज का एक मजबूत चेहरा बना सकता है।
यदि वे जनसुराज से जुड़ते हैं, तो यह बिहार की पारंपरिक राजनीति के लिए एक बड़ा झटका होगा और युवा वर्ग के लिए एक नई उम्मीद बनेगी। उनकी प्रशासनिक पृष्ठभूमि और जनता के बीच बढ़ती लोकप्रियता उन्हें बिहार विधानसभा में एक प्रभावी नेता बना सकती है।
बिहार के भविष्य के लिए एक नया नेतृत्व
आनंद मिश्रा ने अपने जीवन में जो भी किया, वह साहस और ईमानदारी के साथ किया। चाहे वह एक पुलिस अधिकारी के रूप में हो या अब एक राजनेता के रूप में। बिहार की जनता, खासकर युवा वर्ग, उनसे उम्मीद कर रहा है कि वे राज्य में एक नई राजनीति की नींव रखेंगे, जहां विकास, कानून-व्यवस्था और पारदर्शिता प्राथमिकता होगी।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आनंद मिश्रा 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर के साथ जनसुराज के लिए कोई नई रणनीति अपनाते हैं या अपने दम पर कोई नया राजनीतिक विकल्प तैयार करते हैं। लेकिन यह तय है कि वे बिहार की राजनीति में एक सशक्त युवा नेता के रूप में उभर रहे हैं।












