वर्ष 25 के विस चुनाव में सीएम पद के लिए तेजस्वी सबसे लोकप्रिय चेहरा लेकिन मुख्यमंत्री बनना है मुश्किल

आध्यात्मिक गुरु पंडित कमला पति त्रिपाठी

मुज़फ़्फ़रपुर

इंटरनेट पर उपलब्ध विवरण को आधार माने तो तेजस्वी यादव का जन्म गुरुवार के दिन शुल्क पक्ष की एकादशी को पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के तीसरे चरण में हुआ है। यह बहुत ही शुभ संयोग है।

नाम – तेजस्वी यादव

जन्मतिथि – 9 नवम्बर 1989

समय – दोपहर 2.00 बजे

स्थान – गोपालगंज, बिहार

बिहार में विधानसभा चुनाव के कुछ ही दिन शेष बचे हैं। राजद के प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री के दौड़ में सबसे लोकप्रिय चेहरा हैं। चूंकि राजनीति एवं क्रिकेट संभावनाओं का खेल है। इसमें अगले क्षण में क्या हो जाए, किसी के लिए भी स्पष्ट बता पाना कठिन है। लेकिन हमारे समाज में कुंडली के आधार पर आकलन कर भविष्यवाणी की परंपरा रही है।

यदि लग्न चार्ट को देखें तो कुम्भ लग्न की कुंडली और चन्द्र राशि भी कुम्भ ही बनती है। जिसमें लग्नेश शनि, नवमेश शुक्र (भाग्येश, सुखेश भी) की युति एकादश (लाभ) भाव में है। इन पर पंचम भाव में बैठे द्वितीयेश, एकादशेश गुरु की सप्तम दृष्टि है। यह संयोजन जबर्दस्त लाभदायक है।

पंचमेश, अष्टमेश बुध नवम भाव में सप्तमेश सूर्य एवं तृतीयेश, दशमेश अस्त मंगल के साथ युति बनाए हैं। इन पर पंचम भाव में बैठे द्वितीयेश, एकादशेश वक्री गुरु की दृष्टि गंगा जल छिड़क रही है। सत्ता के लिए गठबंधन का सुख मिलेगा।

षष्ठेश यानी छठे भाव के स्वामी चन्द्रमा लग्न में बैठकर अतिशय भावुकता दे रहे। माता जी का भरपूर आशीर्वाद मिलेगा लेकिन अधिरतावश कभी-कभी गलत निर्णय लेने से नुकसान कर बैठेंगे।

छठे भाव में केतु है। यह भाव रोग, शत्रु, कर्जा, मुकदमा का है। लेकिन यह उपचय भाव है जिसमें केतु जैसे पाप ग्रह का बैठना थोड़ी बहुत परेशानियों देने के साथ नियंत्रण भी बनाए रखेगा।

जबकि द्वादश (12वें) भाव में राहु मकर राशि में बैठा है। हालांकि राहु लग्नेश शनि का मित्र माना गया है और मित्र राशि मकर में है। लेकिन इसका 12वें भाव में बैठना बहुत अनुकूल नहीं माना जाएगा। क्योंकि यह व्यय, कैदखाना, अस्पताल, मोक्ष, विदेश का भाव है।

कुंडली के अनुसार वर्तमान परिणाम क्या होगा?

इसके लिए महादशा, अन्तर्दशा एवं ग्रहों के गोचर पर जाना होगा। इनकी कुंडली में वर्तमान में बुध की महादशा में राहु की अन्तर्दशा चल रही जो जुलाई 26 तक है। दोनों एक-दूसरे के मित्र है। राहु को बुध के अनुसार फल देने वाला माना गया है। गोचर में राहु लग्न कुम्भ राशि में है। ध्यान दें अभी कुम्भ राशि की साढ़े साती का अंतिम चरण चल रहा। और लग्नेश शनि वक्री अवस्था में है द्वितीय भाव मीन राशि में। गुरु पंचम भाव में है। चूंकि शनि लग्नेश होकर भाग्येश शुक्र के साथ लाभ भाव में है। इसलिए अंतिम चरण में अवश्य लाभ देकर जाएंगे।

राहु लग्न में बैठकर मीडिया, जनमानस में खूब चर्चित बनाएगा। तगड़े विपक्ष के रूप में कठिन प्रतिस्पर्धा देगा विरोधियों को। राहु पर गुरु की दृष्टि राहत दे रही बावजूद इसके इस ग्रह का नैसर्गिक स्वभाव भ्रम, अस्थिरता एवं अनिश्चितता देना है। राहु के नक्षत्र स्वामी मंगल है। लग्न चार्ट को देखें तो मंगल नवम भाव में अस्त अवस्था मे है। लग्न चार्ट से राहु 12वें भाव के फल प्रतिनिधित्व कर रहा, भले ही गोचर में लग्न में है। वर्ष 26 के जुलाई तक इसकी अन्तर्दशा है। सप्तम भाव में केतु है। यह भाव गठबंधन का कारक है। और यहां बैठा केतु का स्वभाव संबंध जोड़ने के लिए नहीं तीव्र विच्छेद कराने के लिए जाना जाता है।

कुल मिलाकर स्थिति ये दिख रही कि वर्ष 26 के जुलाई महीने के बाद से जब गुरु की अन्तर्दशा आएगी। इनके राज पद के लिए रास्ते अनुकूल बनेंगे। इससे पहले अचानक, अप्रत्याशित रूप से कुछ सकारात्मक बातें घटित होंगी, दिखेंगी लेकिन टिकेगी नहीं। क्योंकि राहु मायावी ग्रह है, इसका चाल, चरित्र और चेहरा पल में तोला, पल में माशा करने के लिए जगजाहिर है।

(नोट – इस आलेख का उधेश्य किसी की भावना को आहत करना नहीं है। ना ही मैं पूर्व में की गई भविष्यवाणी की तरह इसकी भी सत्यता को लेकर कोई दावा या वादा करता हूं। कुंडली के लग्न चार्ट, चल रही महादशा, अन्तर्दशा और गोचर में ग्रहों की स्थिति के अनुसार आकलन किया गया है। मेरे लिखे का अन्य भविष्यवक्ताओं या व्यक्ति विशेष से आम सहमति मिलना अनिवार्य नहीं है। फिर यदि किसी की भावना होती है तो क्षमा प्रार्थी हूं।)

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