15 जनवरी को ही क्यों है मकर संक्रांति?

आध्यात्मिक गुरु पंडित कमला पति त्रिपाठी

🪷⭐🪷मकर संक्रांति पर सूर्य देव की उपासना, पवित्र स्नान (गंगाजल मिलाकर), तिल व खिचड़ी का दान और सेवन, और सात्विक भोजन करना चाहिए; जबकि देर तक सोना, तामसिक भोजन (मांस-मदिरा, प्याज-लहसुन), पेड़ काटना, लोहे व बासी सामान का दान, और क्रोध-कलह से बचना चाहिए, क्योंकि यह दिन दान, जप, तप और सद्भाव का पर्व है जो सुख-समृद्धि लाता है.


शुभ कार्य..
पवित्र स्नान सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदी गंगा यमुना , सरस्वती,गंगासागर , प्रयाग या हरिद्वार आदि पुण्य तीर्थों स्नान भागवत दर्शन या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें.
सूर्य उपासना तांबे के लोटे से जल, गुड़, तिल, फूल और अक्षत मिलाकर मंत्र..ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र के साथ सूर्य देव को अर्घ्य दें.
तिल का प्रयोग..तिल का सेवन (तिल-गुड़) और तिल मिश्रित जल से स्नान करें, इससे शनि दोष शांत होता है.
दान..खिचड़ी, तिल, गुड़, घी, गर्म कपड़े और धन का दान करें, खासकर जरूरतमंदों और साधु-संतों को.
सात्विक भोजन: उड़द दाल-चावल की खिचड़ी खाएं और दही-चूड़ा (पोहा) का सेवन करें.
गौ सेवा: गाय को हरा चारा, गुड़ और तिल खिलाएं.
पाठ-पूजा.. सूर्य चालीसा या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें.
वर्जित कार्य..
देर तक सोना सूर्योदय के बाद तक सोने से बचें.
तामसिक भोजन.. मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और ज्यादा तला-भुना भोजन न करें.
प्रकृति को नुकसान.. पेड़-पौधों की कटाई या उन्हें नुकसान न पहुंचाएं.
अनुचित दान: पुराना/फटा कपड़ा, बासी भोजन, लोहे की वस्तुएं, प्लास्टिक या धारदार चीजें दान न करें (इससे शनि दोष और कलह बढ़ती है).
अपशब्द/कलह,क्रोध, झगड़ा, वाद-विवाद और कटु वचन बोलने से बचें; वाणी पर नियंत्रण रखें.
अनुचित कार्य बिना स्नान-दान के भोजन न करें.
यह पर्व संयम, दान और सद्भाव का है, जिसका पालन करने से सुख-समृद्धि आती है.

15 जनवरी को ही क्यों है मकर संक्रांति?

आमतौर पर यह पर्व 14 जनवरी को मनाया जाता है, लेकिन इस बार ग्रहों की स्थिति कुछ अलग है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूर्य देव 14 जनवरी 2026 की रात 9:19 बजे मकर राशि (उत्तरायण) में प्रवेश करेंगे। चूंकि सूर्य का राशि परिवर्तन रात में हो रहा है, इसलिए ‘उदयातिथि’ के सिद्धांत के अनुसार, संक्रांति का स्नान, दान और उत्सव 15 जनवरी को करना ही शास्त्रसम्मत और फलदायी माना गया है।

इसके अलावा, 14 जनवरी को ‘षटतिला एकादशी’ भी पड़ रही है। एकादशी के दिन चावल और तिल का सेवन वर्जित होता है, जबकि संक्रांति पर इनका प्रयोग अनिवार्य है। इन्हीं कारणों से 15 जनवरी को ही पर्व मनाने का निर्णय लिया है।

संक्रांति का आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व

मकर संक्रांति वह समय है जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। धार्मिक दृष्टि से उत्तरायण को ‘देवताओं का दिन’ माना जाता है। इसी दिन से ‘खरमास’ समाप्त हो जाता है और विवाह, गृह प्रवेश व यज्ञ जैसे शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव के घर (मकर राशि) जाते हैं, जो पिता-पुत्र के संबंधों में कड़वाहट खत्म कर मधुरता लाने का प्रतीक है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने भी मोक्ष प्राप्ति के लिए उत्तरायण होने तक अपने प्राण नहीं त्यागे थे। साथ ही, इसी दिन मां गंगा, भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए सागर में जाकर मिली थीं।


🪷⭐🪷 🪷⭐🪷

Related Posts

मुजफ्फरपुर में पैक्स अध्यक्षों की महत्वपूर्ण विचार-विमर्श बैठक, धान अधिप्राप्ति की समस्याओं और किसान हितों पर गहन मंथन – सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक अध्यक्ष अमरनाथ पांडेय ने दिया भरोसा

मुजफ्फरपुर, 30 अक्टूबर 2026 | STAR INDIA NOW NEWS जय सहकारिता, जय किसान, जय बिहार के नारों के साथ आज मुजफ्फरपुर में पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों की एक बेहद…

अनंत सिंह को बाहर कर जदयू ने क्या खोया, क्या पाया?

संतोष राज पाण्डेय जनता दल यूनाइटेड ने आखिरकार वो फैसला ले ही लिया, जिसकी अटकलें पिछले कई हफ्तों से लग रही थीं। मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह उर्फ छोटे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *