संतोष राज पाण्डेय
आजकल की कुछ युवतियों में एक अजीब और आत्मघाती ट्रेंड देखने को मिल रहा है। लड़कियां अक्सर एक खास किस्म के आवारा, ‘रोमियो-स्टाइल’ लड़कों की तरफ आकर्षित हो जाती हैं। ये वो लड़के होते हैं जिनका करियर, भविष्य या कड़ी मेहनत से कोई सरोकार नहीं होता. देर रात तक पार्टियां करना, अच्छा डांस कर लेना इनकी पहचान होती है। चमचमाती मोटरसाइकिल या कार पर लॉन्ग ड्राइव का लालच देकर ये बेहद कम समय में लड़कियों को अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं.
सपनों का राजकुमार_
समस्या की जड़ कुछ लड़कियों की विरोधाभासी मानसिकता में भी है। वे एक ऐसा पति चाहती हैं जिसके पास आलीशान बंगला हो, स्विमिंग पूल हो, नौकर-चाकर हों और पैसे की बरसात हो। लेकिन इसके साथ ही, उन्हें दैनिक जीवन में वो ‘रोमियो’ जैसा रोमांटिक, पार्टियां करने वाला और हर वक्त उपलब्ध रहने वाला फुरफुराता लड़का भी चाहिए.यही असमंजस और दोहरे मापदंड उनकी जिंदगी को तबाह कर देते हैं। सामाजिक या आर्थिक सुरक्षा के लिए वे शादी की ‘हाँ’ तो कहीं और कर लेती हैं, लेकिन उनका मन इस छलावे वाले आकर्षण में ही अटका रहता है। नतीजा? शादी के बाद भयानक बिखराव, तलाक, असहनीय मानसिक पीड़ा और कुछ खौफनाक मामलों में तो हत्या जैसी जघन्य वारदातें।
अभिभावकों को अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर बच्चों को बचपन से ही नैतिक और धार्मिक संस्कार देने होंगे। जिन परिवारों में बच्चों को क्लबों में अनाप-शनाप पार्टी करने की बेलगाम छूट नहीं होती, वहाँ ऐसी दुर्घटनाओं की गुंजाइश न के बराबर होती है। नशे पर घर में सख्त पाबंदी होनी चाहिए। बच्चों को यह समझाना बेहद ज़रूरी है कि जीवन में पैसा और दिखावा ही सब कुछ नहीं है; परिश्रम, ईमानदारी और सामाजिक मूल्य ही जीवन को स्थिरता देते हैं। हाँ, विवाह के समय बच्चों की राय का सम्मान अवश्य करें, लेकिन यह तभी सार्थक है जब बच्चे मानसिक रूप से परिपक्व और सही-गलत का निर्णय लेने के योग्य हों.यह समय समाज के लिए आत्ममंथन का है। अगर हम अपनी आने वाली पीढ़ी को सही संस्कार और मर्यादा का पाठ नहीं पढ़ाएंगे, तो ऐसे सिया _केतन जैसे दिल दहला देने वाले कांड रुकने वाले नहीं हैं।

मनोवैज्ञानिक विश्लेषण: इस भटकाव के मुख्य कारण
सतही तौर पर केतन जैसे संभ्रांत मंगेतर को छोड़कर चेतन जैसे लंपट की ओर आकर्षित होने का फैसला मूर्खतापूर्ण लगता है, लेकिन इसके पीछे गहरा सामाजिक मनोविज्ञान है। पहला कारण है ‘अटेंशन’ की लत का भ्रम। केतन एक व्यस्त और गंभीर व्यवसायी थे, जबकि बेरोजगार चेतन का एकमात्र ‘फुल-टाइम जॉब’ चौबीस घंटे लड़की को रीझाना था। महज 18 दिनों में 238 घंटे की बातचीत इसका सबूत है। आज की ‘अटेंशन सीकर’ जनरेशन इस निरंतर मिलने वाली झूठी चापलूसी को ही ‘सच्चा प्यार’ मान बैठती है और संजीदा लड़के की व्यस्तता को उसकी बेरुखी समझ लेती है।
दूसरा कारण है अनुशासन के मुकाबले तात्कालिक रोमांच (Thrill) । गंभीर लड़के जीवन में एक गरिमा, नियम और सामाजिक मर्यादा के साथ चलते हैं, जो क्लबिंग और दिखावे की शौकीन लड़कियों को ‘बोरिंग’ लगने लगता है। इसके विपरीत, रोमियो टाइप लड़कों का लापरवाह मिजाज, जैसे देर रात घूमना या नियम तोड़ना, उन्हें एक झूठा एडवेंचर देता है। साथ ही, चेतन जैसे लड़के लड़कियों की हर गलत-सही बात में ‘हाँ में हाँ’ मिलाकर उनके ईगो को संतुष्ट रखते हैं, जबकि एक संजीदा जीवनसाथी हकीकत का आईना दिखाता है जो अत्यधिक लाड़-प्यार में पली लड़कियों को बर्दाश्त नहीं होता।
अंततः, यह ‘बैड बॉय सिंड्रोम’ और अहंकार (God Complex) का घातक मिश्रण बन जाती हैं.









