सड़क पर गांधी, सियासत का नया संकेत?राहुल-प्रियंका का जंतर-मंतर मार्च, CJP का बहाना या 2029 की पटकथा?

संतोष राज पाण्डेय,पटना


पिछले 48 घंटों में दिल्ली की सड़कों पर जो हुआ, वह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं था। वह आने वाले भारत की राजनीति का ट्रेलर था। एक तरफ जंतर-मंतर पर कांग्रेस का हल्ला, दूसरी तरफ हरियाणा के कुंडली में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का तीखा बयान – “भारत के युवाओं को रोकना संभव नहीं है।” और बीच में सवाल – आखिर कितनी ट्रेनें रोकोगे, कितनी सड़कें जाम करोगे?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नाम पर बुलाया गया यह प्रदर्शन, जिसकी अनुमति दिल्ली पुलिस ने नियमों के हवाले से रद्द कर दी, देखते ही देखते कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरों का शक्ति प्रदर्शन बन गया। प्रियंका गांधी का सड़क पर लेट जाना, पुलिस की बस में हिरासत में लिया जाना, और उनका आरोप – “पुलिस ने पूरे शरीर पर खरोंच दिया, जमीन पर फेंक दिया” – ये तस्वीरें ही इस आंदोलन को वायरल बना गईं।

1. CJP क्या है? मुद्दा क्या है?
CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी – नाम भले ही अटपटा लगे, लेकिन इसके पीछे छात्र संगठनों और विपक्षी कार्यकर्ताओं का एक बड़ा नेटवर्क है। इनकी मांग थी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध। दिल्ली पुलिस का तर्क साफ था – प्रदर्शन की सूचना 10 दिन पहले नहीं दी गई, BNSS की धारा 163 लागू है, कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। लेकिन राजनीति में अनुमति से ज्यादा संदेश महत्वपूर्ण होता है।

2. प्रियंका का सड़क पर लेटना – मजबूरी या रणनीति?
प्रियंका गांधी जब सड़क पर लेटीं, तो यह 2019 की सोनभद्र की वह तस्वीर याद दिला गई जब वह रात भर धरने पर बैठी थीं। प्रियंका हमेशा से इमोशनल पॉलिटिक्स की प्रतीक रही हैं। उनका यह कहना – “क्या यह तरीका है? आप देख सकते हैं कि ये क्या कर रहे हैं” – सीधे जनता से संवाद था। यह दृश्य कैमरे के लिए नहीं, बल्कि कार्यकर्ता के लिए था। संदेश साफ था – “हम डरने वाले नहीं हैं।”

राहुल गांधी का इस पूरे घटनाक्रम के दौरान बैकग्राउंड में रहना और प्रियंका का फ्रंट पर आना, कांग्रेस की नई रणनीति की ओर इशारा करता है। अब राहुल नीति की बात करेंगे, प्रियंका सड़क की लड़ाई लड़ेंगी।

3. चिराग पासवान का बयान – NDA के अंदर की चेतावनी?
सबसे दिलचस्प बयान आया NDA के ही सहयोगी चिराग पासवान का। सोनीपत से उन्होंने कहा – “ये भारत के युवा हैं, इन्हें रोका नहीं जा सकता।” और सवाल पूछा – “कितनी ट्रेनें रोक सकते हो?”

चिराग का यह बयान दो धार वाला है। एक तरफ वह सरकार की पाबंदियों पर सवाल उठा रहे हैं, दूसरी तरफ युवाओं को यह भरोसा दे रहे हैं कि उनकी आवाज दबेगी नहीं। चिराग खुद युवा नेता हैं, बिहार में उनकी नजर 2025 के बाद 2029 पर है। वह जानते हैं कि युवा वोट किसी भी गठबंधन को बना या बिगाड़ सकता है। इसलिए वह NDA में रहकर भी NDA की लाइन से अलग, युवाओं की लाइन ले रहे हैं। यह भविष्य के लिए खुद को प्रोजेक्ट करने का तरीका है।

4. ट्रेनें रद्द, सड़कें जाम – क्या सरकार डर रही है?
दिल्ली में बड़े प्रदर्शन से पहले ट्रेनें रद्द होना, मेट्रो स्टेशनों पर बैरिकेडिंग, धारा 163 – यह प्रशासनिक एहतियात है या राजनीतिक डर? इतिहास गवाह है, जब-जब सरकारें आंदोलनों को रोकने के लिए ट्रांसपोर्ट रोकती हैं, तब-तब आंदोलन और बड़ा होता है। 2020 के किसान आंदोलन में भी यही हुआ था। युवा अगर ठान ले कि दिल्ली आना है, तो वह बस से नहीं तो पैदल भी आएगा। चिराग ने उसी सच्चाई को शब्द दिए हैं।

5. भविष्य का संकेत क्या है?
यह प्रदर्शन 2029 के आम चुनाव की पहली झलक है।

पहला संकेत – विपक्ष अब संसद नहीं, सड़क से लड़ना चाहता है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने यह सिखाया है कि सड़क पर चलने से वोट मिलता है।

दूसरा संकेत – कांग्रेस में प्रियंका युग की शुरुआत। अब तक प्रियंका को UP तक सीमित रखा गया था। अब उन्हें राष्ट्रीय चेहरा बनाया जा रहा है। उनका सड़क पर लेटना, महिला कार्यकर्ताओं में जोश भरेगा।

तीसरा संकेत – NDA में युवा चेहरों की बगावत की आहट। चिराग पासवान जैसे नेता अब सिर्फ हां में हां नहीं मिलाएंगे। वह युवाओं की बात करेंगे, भले ही वह सरकार के खिलाफ क्यों न जाए।

चौथा संकेत – CJP जैसे छोटे मंच बड़े मंच बनेंगे। आने वाले दिनों में छात्र संगठन, युवा संगठन ही असली विपक्ष की भूमिका में दिखेंगे।

निष्कर्ष यह है कि जंतर-मंतर की यह लड़ाई सिर्फ एक दिन की नहीं है। यह लड़ाई 2029 के लिए नैरेटिव सेट करने की है। सरकार अगर इसे केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा समझेगी, तो गलती करेगी। और विपक्ष अगर इसे सिर्फ फोटो-ऑप समझेगा, तो भी चूकेगा।

भारत का युवा न तो ट्रेन रुकने से रुकेगा, न सड़क जाम होने से। वह सवाल पूछेगा – और सोशल मीडिया पर पूछेगा। जो दल उसके सवाल का जवाब संवाद से देगा, वही भविष्य में राज करेगा। सड़क जाम करने से नहीं, संवाद से समाधान निकलेगा – चिराग ने सही कहा, लेकिन संवाद तभी होगा जब सड़क पर उतरने की आजादी भी होगी।

यही लोकतंत्र है। यही भारत है।

– संतोष राज पाण्डेय, संपादक, STAR INDIA NOW


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