संतोष राज पाण्डेय,पटना
पिछले 10 दिनों में जंतर मंतर फिर से भारतीय राजनीति का केंद्र बन गया है। वजह है Gen-Z लेड कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन और उस पर विपक्ष की बंटी हुई राजनीति।
1. पृष्ठभूमि क्या है?
मई 2026 में NEET पेपर लीक और बेरोजगारी पर सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी में कुछ बेरोजगार युवाओं को “कॉकरोच” कहने जैसे बयान के बाद छात्र नाराज हुए। इसी से निकली Cockroach Janta Party – जो खुद को राजनीतिक पार्टी के रूप में रजिस्टर्ड भी नहीं मानती। इनका पहला बड़ा प्रदर्शन जून 2026 में NEET को लेकर हुआ, जिसके बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।
अब अक्टूबर में इनका दूसरा नारा है – “वोट चोरी” और SIR (Special Intensive Revision) का विरोध। CJP का आरोप है कि चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट अपडेट प्रक्रिया में लाखों Gen-Z मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं और CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें।
CJP ने 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर “Dilli Chalo” का कॉल दिया था और दिल्ली पुलिस को औपचारिक लेटर सौंपकर कहा था कि देशभर के युवा जंतर मंतर पर जुटेंगे।
2. विपक्ष का समर्थन – लेकिन एकजुट नहीं
इस आंदोलन को INDIA ब्लॉक के कई दलों का समर्थन मिला, लेकिन कांग्रेस की दूरी ने फूट उजागर कर दी।
- समाजवादी पार्टी: अखिलेश यादव ने खुलकर CJP का समर्थन किया और कहा “जंतर मंतर हर जगह उगेगा”। उन्होंने X पर लिखा कि युवाओं को रोकना संभव नहीं और अगर दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी तो यह आंदोलन देश के अन्य हिस्सों में फैलेगा।
- AAP और लेफ्ट: आम आदमी पार्टी, SFI, DYFI, AISA जैसे छात्र संगठनों ने प्रेस क्लब में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा “ये लड़ाई we the people बनाम BJP की है”।
- कांग्रेस: रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस इस प्रदर्शन में शामिल नहीं हुई, भले ही वह सपा की सहयोगी है।
- दक्षिण के नेता: BRS के KTR, DMK के MK Stalin, पूर्व केरल CM पिनराई विजयन ने CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की गिरफ्तारी को “नए लेवल की इमरजेंसी” बताया और कहा कि Gen-Z को जेल में डालना असुरक्षा दिखाता है।
3. जंतर मंतर का डीनोटिफिकेशन – नया ट्रिगर
दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर को designated protest site के रूप में डीनोटिफाई कर दिया, जिसके बाद 15 अक्टूबर को यूथ कांग्रेस, SFI, DYFI ने “Reclaim Jantar Mantar” और “Gyanesh Kumar must resign” के नारों के साथ प्रदर्शन किया। कम से कम 50 प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए।
विपक्ष इसे लोकतांत्रिक स्पेस पर हमला बता रहा है। यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में पटेल चौक से मार्च निकाला गया।
4. विपक्ष की 3 तरह की राजनीति
इस मुद्दे पर विपक्ष की राजनीति को तीन लेयर में समझिए:
A) मुद्दे को लपकना: अखिलेश, AAP, लेफ्ट इसे 2027 से पहले युवा वोट बैंक साधने का मौका मान रहे हैं। SIR में वोटर लिस्ट से नाम कटने का आरोप बिहार, यूपी, बंगाल में सीधे उनके वोटरों से जुड़ा है। इसलिए वे “वोट चोरी” नैरेटिव को Gen-Z के कंधे पर चढ़ाकर बड़ा बना रहे हैं।
B) दूरी बनाकर नैतिक समर्थन: कांग्रेस और कुछ दल सड़क पर उतरने से बच रहे हैं क्योंकि CJP के पिछले प्रदर्शन में PM के खिलाफ अभद्र भाषा के वीडियो वायरल हुए थे। उस समय कई युवाओं को माफी मांगनी पड़ी थी और रिपोर्ट में कहा गया कि प्रोटेस्ट की मर्यादा टूटी थी। इसलिए बड़ी पार्टियां बैकफुट पर हैं – समर्थन ट्वीट तक सीमित।
C) भाजपा का काउंटर: भाजपा और चुनाव आयोग आरोपों को खारिज कर रहे हैं कि SIR रूटीन प्रक्रिया है मृत और डुप्लीकेट वोटर हटाने की। अमेरिका की कमेंटेटर Mary Millben ने तो दावा किया कि CJP को US के डोनर्स फंड कर रहे हैं जो PM मोदी के खिलाफ हैं।
5. Gen-Z फैक्टर – असली ताकत या इस्तेमाल?
विपक्ष के लिए Gen-Z एक दोधारी तलवार है। 18-25 साल के वोटर पहली बार वोटर लिस्ट से जुड़ रहे हैं। अगर उनका नाम कटा तो नाराजगी सीधे चुनाव पर असर डालेगी। CJP के नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रंका खुद को किसी पार्टी का नहीं बताते, लेकिन AISA अध्यक्ष नेहा बोरा कह चुकी हैं कि यह कॉल CJP, INDIA विपक्ष और सभी छात्र विंग्स का साझा कॉल है।
दूसरी तरफ सरकार कह रही है कि Gen-Z के नाम पर अराजकता फैलाई जा रही है और जंतर मंतर जैसे सेंसिटिव एरिया में बिना अनुमति भीड़ जुटाना सुरक्षा का मुद्दा है। 10 अक्टूबर से पहले ही CJP के फाउंडर को मुंबई से दिल्ली आते ही हिरासत में लिया गया था।
निष्कर्ष:
जंतर मंतर आज सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि लोकतंत्र में विरोध की जगह को लेकर प्रतीकात्मक लड़ाई बन गया है। विपक्ष इसे “लोकतंत्र बचाओ” के नैरेटिव में बदलना चाहता है, लेकिन अंदर ही अंदर कांग्रेस की दूरी और सपा-AAP की अतिसक्रियता दिखाती है कि 2029 से पहले कौन Gen-Z का असली चैंपियन बनेगा, इसकी होड़ भी चल रही है। CJP जैसे अनौपचारिक समूहों के सहारे विपक्ष को युवा गुस्सा तो मिल रहा है, पर नियंत्रण किसका रहेगा, यह सबसे बड़ा सवाल है।








