मुजफ्फरपुर में पैक्स अध्यक्षों की महत्वपूर्ण विचार-विमर्श बैठक, धान अधिप्राप्ति की समस्याओं और किसान हितों पर गहन मंथन – सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक अध्यक्ष अमरनाथ पांडेय ने दिया भरोसा

मुजफ्फरपुर, 30 अक्टूबर 2026 | STAR INDIA NOW NEWS

जय सहकारिता, जय किसान, जय बिहार के नारों के साथ आज मुजफ्फरपुर में पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों की एक बेहद महत्वपूर्ण विचार-विमर्श बैठक आयोजित की गई। यह बैठक खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में धान अधिप्राप्ति की तैयारी को लेकर बुलाई गई थी, लेकिन इसमें बीते पांच वर्षों के दौरान अधिप्राप्ति के कार्य में हुई हानियों, त्रुटियों और लगातार सामने आ रही गंभीर समस्याओं पर खुलकर चर्चा हुई।

बैठक का आयोजन मुजफ्फरपुर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के तत्वावधान में किया गया, जिसके सौजन्य से मुजफ्फरपुर जिले के सभी सम्मानित पैक्स अध्यक्ष और व्यापार मंडल अध्यक्षों को आमंत्रित किया गया था। इस बैठक में सबसे बड़ी उपस्थिति मुजफ्फरपुर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष श्री अमरनाथ पाण्डेय जी की रही, जिन्होंने स्वयं उपस्थित होकर किसान और पैक्स हितों की रक्षा पर विस्तार से संवाद किया और पैक्स अध्यक्षों की पीड़ा को सुना।

बैनर पर लिखा था बैठक का उद्देश्य
बैठक स्थल पर लगे बैनर पर स्पष्ट लिखा था – “दिनांक 30.10.2026 को 12:00 बजे अपराह्न में खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में धान अधिप्राप्ति की तैयारी एवं विगत 5 वर्षों में अधिप्राप्त कार्य में हुई हानियों/त्रुटियों सहित अन्य प्रमुख बिंदुओं पर परिचर्चा/विचार-विमर्श हेतु आयोजित बैठक में मुजफ्फरपुर जिला के सभी सम्मानित पैक्स/व्यापार मंडल अध्यक्षों का हार्दिक स्वागत है।”

बैनर पर जय सहकारिता, जय किसान, जय बिहार का नारा भी लिखा था, जो इस बैठक की भावना को दर्शाता है।

क्या हैं धान अधिप्राप्ति की मुख्य समस्याएं?

बैठक में मौजूद पैक्स अध्यक्षों ने एक-एक करके अपनी समस्याएं रखीं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से धान अधिप्राप्ति के नाम पर पैक्स अध्यक्षों को भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

  1. सीएमआर जमा करने में देरी और कटौती: पैक्स द्वारा किसानों से धान खरीदने के बाद उसे राइस मिलों को देना होता है और मिलों को सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) जमा करना होता है। लेकिन कई मिलें समय पर सीएमआर जमा नहीं करतीं, जिसके कारण पैक्स अध्यक्षों पर ब्याज और जुर्माने का बोझ पड़ता है।
  2. भंडारण और परिवहन का खर्च: धान के भंडारण के लिए पर्याप्त गोदाम नहीं हैं। खुले में धान रखने से बर्बादी होती है। परिवहन का खर्च भी पैक्स को ही वहन करना पड़ता है, जिसकी प्रतिपूर्ति समय पर नहीं होती।
  3. कमीशन और प्रोत्साहन राशि में देरी: सरकार द्वारा पैक्स को दिया जाने वाला कमीशन और प्रोत्साहन राशि महीनों-महीनों तक नहीं मिलती, जिससे पैक्स की आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है और वे अगली खरीदारी के लिए पूंजी जुटा नहीं पाते।
  4. तकनीकी समस्याएं – पोर्टल और टैगिंग: ऑनलाइन पोर्टल पर धान की एंट्री, किसान रजिस्ट्रेशन और टैगिंग में लगातार तकनीकी बाधाएं आती हैं। सर्वर डाउन होने से किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
  5. पांच वर्षों की हानि का मुद्दा: सबसे गंभीर मुद्दा बीते 5 वर्षों में अधिप्राप्ति में हुई हानि का था। कई पैक्स अध्यक्षों ने बताया कि नमी, वजन घटने और अन्य कारणों से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई आज तक नहीं हुई।

अमरनाथ पांडेय जी ने क्या कहा?

मुजफ्फरपुर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष श्री अमरनाथ पाण्डेय जी ने सभी अध्यक्षों की बातों को गंभीरता से सुना। उन्होंने कहा कि पैक्स ही सहकारिता की आत्मा है और किसान ही देश की रीढ़ हैं। यदि पैक्स ही कमजोर हो जाएगा तो किसान कैसे मजबूत होगा?

उन्होंने भरोसा दिलाया कि –

  • पैक्स अध्यक्षों की हानि और समस्याओं को लेकर वे बिहार राज्य सहकारी बैंक और सहकारिता विभाग के उच्च अधिकारियों से मिलकर एक ठोस समाधान निकालेंगे।
  • धान अधिप्राप्ति के लिए बैंक की तरफ से जो भी वित्तीय सहायता और कैश क्रेडिट लिमिट की जरूरत होगी, उसे प्राथमिकता पर पूरा किया जाएगा।
  • मिलों द्वारा सीएमआर जमा न करने के मामले में बैंक स्तर पर भी निगरानी की जाएगी ताकि पैक्स अध्यक्षों पर अनावश्यक दबाव न बने।
  • इस बार खरीफ 2026-27 में किसी भी पैक्स अध्यक्ष को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा, हर स्तर पर बैंक उनके साथ खड़ा रहेगा।

उनके संबोधन के बाद पैक्स अध्यक्षों में नई ऊर्जा और भरोसा देखने को मिला।

किसान-पैक्स हितों की रक्षा ही मुख्य लक्ष्य

बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि इस बार धान अधिप्राप्ति को पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाया जाए। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का पूरा लाभ मिले, इसके लिए पैक्स गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे। साथ ही, जो भी समस्याएं हैं, उनका एक संयुक्त ज्ञापन तैयार कर जिला प्रशासन और राज्य सरकार को सौंपा जाएगा।

अंत में सभी अध्यक्षों ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि वे सहकारिता आंदोलन को मजबूत करेंगे और किसान के हित में किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे। बैठक का संचालन सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ और यह उम्मीद जताई गई कि इस विचार-विमर्श का सकारात्मक परिणाम आने वाले धान अधिप्राप्ति सत्र में जरूर दिखेगा।


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