कहता है, सो करता है – मिथिलेश तिवारी, बिहार का वो जननायक जिस पर जनता को भरोसा है

संतोष राज पाण्डेय,पटना

बिहार की राजनीति में ऐसे नेताओं की कमी नहीं है जो मंच से बड़े-बड़े वादे करते हैं, भाषणों में बिहार को स्वर्ग बनाने का दावा करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद जनता से मुंह मोड़ लेते हैं। जनता भी अब ऐसे नेताओं को पहचान चुकी है। लेकिन इसी बिहार की धरती पर एक ऐसा नेता भी है, जिसके बारे में जनता खुद कहती है – “जो कहता है, वह करता है, और जो नहीं कहता है, वह डेफिनिट करता है।”

हम बात कर रहे हैं बिहार के शिक्षा मंत्री और गोपालगंज के बैकुंठपुर से विधायक श्री मिथिलेश तिवारी की।

बैकुंठपुर की गलियों से लेकर पटना के सचिवालय तक, और एक साधारण किसान के खेत से लेकर बिहार के किसी स्कूल के क्लासरूम तक, आज मिथिलेश तिवारी का नाम एक भरोसे के प्रतीक के रूप में लिया जाता है। यह भरोसा एक दिन में नहीं बना। यह भरोसा भाषणों से नहीं बना। यह भरोसा बना है वर्षों की तपस्या, जमीन से जुड़ाव, और कहे हुए हर शब्द को पूरा करने की जिद से।

  1. बैकुंठपुर से बिहार तक का सफर

मिथिलेश तिवारी का राजनीतिक जीवन किसी विरासत की देन नहीं है। उन्होंने राजनीति को एक मिशन की तरह लिया। बैकुंठपुर जैसे क्षेत्र में जहां कभी विकास की रोशनी पहुंचना भी मुश्किल माना जाता था, वहां उन्होंने जनता के बीच रहकर, उनके सुख-दुख को अपना बनाकर अपनी पहचान बनाई।

आज बैकुंठपुर के लोग कहते हैं – “हमारा विधायक नहीं, हमारा बेटा है, हमारा भाई है।” यह रिश्ता किसी चुनावी समीकरण से नहीं बना। यह रिश्ता बना है हर सुख में साथ खड़े रहने से, हर दुख में कंधा देने से, हर मुसीबत में सबसे पहले पहुंचने से।

जब बाढ़ आती है तो मिथिलेश तिवारी सबसे पहले नाव पर दिखते हैं। जब किसी गरीब की बेटी की शादी होती है तो वे अभिभावक बनकर खड़े रहते हैं। जब किसी किसान की फसल बर्बाद होती है तो वे पटना में उसकी आवाज बनते हैं। यही कारण है कि बैकुंठपुर की जनता ने उन्हें बार-बार अपना आशीर्वाद दिया।

और यही आशीर्वाद आज उन्हें बिहार के शिक्षा मंत्री के पद तक ले गया है। यह पद उनके लिए कुर्सी नहीं, जिम्मेदारी है।

  1. शिक्षा मंत्री के रूप में एक नई क्रांति

बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर दशकों से सवाल उठते रहे हैं। स्कूलों में शिक्षक नहीं, शिक्षक हैं तो पढ़ाई नहीं, भवन नहीं, व्यवस्था नहीं – यह तस्वीर बिहार की पहचान बन गई थी। लेकिन मिथिलेश तिवारी ने शिक्षा मंत्री बनते ही यह स्पष्ट कर दिया कि अब बिहार की शिक्षा व्यवस्था में बहानेबाजी नहीं चलेगी।

उन्होंने कहा था – “बिहार का हर बच्चा पढ़ेगा, हर स्कूल में शिक्षक होगा, हर क्लास में पढ़ाई होगी।” और आज वह इसे करके दिखा रहे हैं।

उन्होंने स्कूलों का औचक निरीक्षण शुरू किया। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि फाइलों में नहीं, जमीन पर काम दिखना चाहिए। शिक्षकों की उपस्थिति, बच्चों की पढ़ाई, मिड-डे मील की गुणवत्ता, स्कूल भवनों की स्थिति – हर चीज पर उनकी सीधी नजर है।

आज बिहार के सरकारी स्कूलों में एक नई ऊर्जा दिख रही है। बच्चे अब स्कूल जाने में रुचि ले रहे हैं। अभिभावकों का भरोसा सरकारी स्कूलों पर फिर से लौट रहा है। यह बदलाव किसी जादू से नहीं, बल्कि एक मंत्री की इच्छाशक्ति से आया है।

मिथिलेश तिवारी जानते हैं कि बिहार का भविष्य किताबों में छिपा है। अगर आज का बच्चा पढ़ेगा, तभी कल का बिहार आगे बढ़ेगा। इसलिए उन्होंने शिक्षा को सिर्फ विभाग नहीं, बल्कि मिशन बना दिया है।

  1. जो कहता है, वह करता है

राजनीति में सबसे बड़ी कमी विश्वसनीयता की है। नेता कहते कुछ हैं, करते कुछ हैं। लेकिन मिथिलेश तिवारी इस मामले में अलग हैं।

उन्होंने बैकुंठपुर में कहा था – सड़कें बनेंगी। आज बैकुंठपुर के गांव-गांव में पक्की सड़कें हैं।
उन्होंने कहा था – बिजली पहुंचेगी। आज हर टोला, हर घर रोशन है।
उन्होंने कहा था – युवाओं को रोजगार से जोड़ेंगे। आज बैकुंठपुर के सैकड़ों युवा स्वरोजगार, कौशल विकास और सरकारी योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
उन्होंने कहा था – शिक्षा में सुधार होगा। आज पूरे बिहार में इसकी गूंज सुनाई दे रही है।

उनकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

  1. जो नहीं कहता, वह डेफिनिट करता है

मिथिलेश तिवारी की एक और खासियत है जो उन्हें बाकी नेताओं से अलग करती है। वे दिखावा नहीं करते। वे घोषणा करने से पहले काम करते हैं। कई ऐसे काम हैं जिनकी उन्होंने कभी घोषणा नहीं की, लेकिन चुपचाप उसे पूरा करके जनता के सामने रख दिया।

किसी गांव में स्कूल का भवन जर्जर था, उन्होंने कहा नहीं, सीधे भवन बनवा दिया।
किसी गरीब छात्र को पढ़ाई के लिए मदद चाहिए थी, उन्होंने मंच से ऐलान नहीं किया, चुपचाप मदद पहुंचा दी।
किसी क्षेत्र में पानी की समस्या थी, उन्होंने प्रचार नहीं किया, नल-जल पहुंचा दिया।

यही तो एक सच्चे जननायक की पहचान है। जो काम करके दिखाता है, बोलकर नहीं। जनता कहती है – “तिवारी जी बोलते कम हैं, करते ज्यादा हैं। और जो नहीं बोलते, उसे तो पक्का कर ही देते हैं।”

  1. सौ फीसदी जनता का भरोसा क्यों?

आज बिहार की सौ फीसदी जनता मिथिलेश तिवारी पर भरोसा करती है, इसके पीछे कई कारण हैं।

पहला – सादगी: वे मंत्री बनने के बाद भी वही पुराने मिथिलेश तिवारी हैं। वही कुर्ता, वही सादगी, वही जमीन से जुड़ाव। उनसे मिलने के लिए किसी को अपॉइंटमेंट की जरूरत नहीं। वे जनता के बीच रहते हैं।

दूसरा – ईमानदारी: उनके ऊपर आज तक भ्रष्टाचार का एक भी दाग नहीं लगा। राजनीति में रहते हुए भी उन्होंने अपनी छवि को बेदाग रखा है। यही ईमानदारी जनता का भरोसा जीतती है।

तीसरा – विकास की सोच: वे जात-पात, धर्म-मजहब से ऊपर उठकर विकास की बात करते हैं। उनके लिए बैकुंठपुर का हर व्यक्ति अपना है, बिहार का हर बच्चा अपना है।

चौथा – तेज निर्णय: वे फाइलों को लटकाने में विश्वास नहीं रखते। जहां समस्या दिखी, वहीं समाधान। यही उनकी कार्यशैली है।

पांचवा – कार्यकर्ताओं का सम्मान: वे अपने कार्यकर्ताओं को परिवार मानते हैं। यही कारण है कि उनका संगठन आज बिहार में सबसे मजबूत संगठनों में से एक माना जाता है।

  1. विरोधी भी करते हैं सम्मान

बिहार की राजनीति में एक दुर्लभ बात यह है कि मिथिलेश तिवारी का सम्मान उनके विरोधी भी करते हैं। विपक्ष के नेता भी निजी तौर पर मानते हैं कि मिथिलेश तिवारी एक ईमानदार और कर्मठ नेता हैं। यह सम्मान खरीदा नहीं जा सकता, यह कमाया जाता है।

आज जब बिहार में राजनीतिक बहस होती है, तो मिथिलेश तिवारी का नाम एक ऐसे नेता के रूप में लिया जाता है जो राजनीति को सेवा मानता है, व्यवसाय नहीं।

  1. बिहार के भविष्य का चेहरा

आज बिहार बदल रहा है। युवा बिहार अब जाति नहीं, विकास चाहता है। युवा बिहार अब भाषण नहीं, नौकरी चाहता है। युवा बिहार अब वादा नहीं, काम चाहता है। और इस बदलते बिहार की उम्मीद का नाम है मिथिलेश तिवारी।

वे शिक्षा मंत्री के रूप में बिहार के लाखों बच्चों का भविष्य गढ़ रहे हैं। वे विधायक के रूप में बैकुंठपुर को आदर्श विधानसभा बना रहे हैं। वे एक जननायक के रूप में बिहार की राजनीति को एक नई दिशा दे रहे हैं।

जिस दिन बिहार के हर नेता ने मिथिलेश तिवारी की तरह “कहना और करना” एक कर लिया, उस दिन बिहार को देश का नंबर वन राज्य बनने से कोई नहीं रोक सकेगा।

निष्कर्ष

अंत में यही कहा जा सकता है कि मिथिलेश तिवारी सिर्फ एक नाम नहीं, एक भरोसा है। एक ऐसा भरोसा जो टूटता नहीं। एक ऐसा नेता जो बिकता नहीं। एक ऐसा जननायक जो झुकता नहीं।

बिहार की जनता ने उन्हें अपना आशीर्वाद दिया है, और उन्होंने जनता के आशीर्वाद को कभी खाली नहीं जाने दिया। यही कारण है कि आज बिहार की सौ फीसदी जनता कहती है – “मिथिलेश तिवारी है तो भरोसा है, विकास है, भविष्य है।”

बिहार को ऐसे ही नेताओं की जरूरत है। बिहार को मिथिलेश तिवारी जैसे जननायक की जरूरत है।

जय बिहार, जय बैकुंठपुर!


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