किसी पीड़िता का प्राइवेट पार्ट छूना और उसकी सलवार का नाड़ा तोड़ना रेप या रेप की कोशिश नहीं माना जाएगा बल्कि ये एक गंभीर यौन उत्पीड़न माना जाएगा : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें HC कहा था कि नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे के नाड़े को तोड़ना रेप नहीं।जस्टिस बीआर गवई और एजे मसीह की बेंच ने बुधवार को इस केस पर सुनवाई की। बेंच ने कहा, “हाईकोर्ट के आदेश में की गई कुछ टिप्पणियां पूरी तरह असंवेदनशील और अमानवीय नजरिया दिखाती हैं।” सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।एक दिन पहले मंगलवार को SC ने हाईकोर्ट के फैसले पर खुद सुनवाई का फैसला किया था। इस फैसले पर कानूनी विशेषज्ञों, राजनेताओं और अलग-अलग क्षेत्रों के एक्सपर्ट्स के विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था।हालांकि, पहले इसी केस पर दायर एक याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया था। इस याचिका में जजमेंट के विवादित हिस्से को हटाने की मांग की गई थी।क्या है मामलाइलाहाबाद हाई कोर्ट ने कासगंज के ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलटते हए कहा था कि किसी पीड़िता का प्राइवेट पार्ट छूना और उसकी सलवार का नाड़ा तोड़ना रेप या रेप की कोशिश नहीं माना जाएगा बल्कि ये एक गंभीर यौन उत्पीड़न माना जाएगा। कासगंज के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर दो आरोपितों को शुरु में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की दारा 18 के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया गया था। इला हाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस मनोहर नारायण मिश्रा की बेंच ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलटते हुए कहा था कि आरोपितों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 354बी और पॉक्सो एक्ट की धारा 9 और 10 के तहत मुकदमा चलाया जाए। हाई कोर्ट के इस फैसले की सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हुई है।

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