ब्यूरोक्रेसी के लिए बिहार में नीतीश का कथित सुशासन ‘स्वर्ग’ के समान है,इंजीनियर मालामाल है

पटना

बिहार में बेलगाम नौकरशाही का आरोप तो कई बार नीतीश कुमार सरकार पर लग चुका है। सियासी गलियारों में अफसरों की धमक देखने को मिलती रहती है। पावर जोन में इस बात की चर्चा होती है कि ब्यूरोक्रेसी के लिए बिहार में नीतीश का कथित सुशासन ‘स्वर्ग’ के समान है। बिना अफसरों के मर्जी की पत्ता नहीं खड़क सकता। रिटायरमेंट के बाद कई IAS खुद को इधर-उधर टॉप पर सेट कर लेते हैं ताकि पावर जोन का कनेक्शन बना रहे। अब तो आलम ये है कि जो सेटिंगबाज इंजीनियर भी रिटायरमेंट के अगले महीने ही अपने आप को ‘फिक्स’ कर लेते हैं। इसकी बानगी इंजीनियर तारणी दास हैं, जिनके ठिकानों पर ED की छापेमारी चल रही है। पटना के फुलवारी शरीफ इलाके में पूर्णेन्दु नगर स्थित उनके आवास पर जांच-पड़ताल जारी है।

भवन निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर तारणी दास पर छापा

बिहार में भवन निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर तारणी दास के ठिकानों पर ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने छापा मारा है। ये कार्रवाई आईएएस अधिकारी संजीव हंस से जुड़े एक मामले और टेंडर में घोटाले की आशंका के चलते की गई है। छापेमारी में हैवी अमाउंट मिलने की खबर है, जिसके बाद नोट गिनने की मशीन मंगाई गई। तारणी दास हाल ही में रिटायर हुए थे, लेकिन सरकार ने उन्हें फिर से नौकरी पर रख लिया था। इस घटना से पटना के बड़े अफसरों में हड़कंप मच गया है।

बिहार भवन निर्माण विभाग मंत्री है जयंत राज कुशवाहा

बिहार भवन निर्माण विभाग में तारणी दास चीफ इंजीनियर (नॉर्थ) के पद पर हैं। भवन निर्माण विभाग के मंत्री जयंत राज कुशवाहा हैं। बैक टू बैक दो-दो बार (महागठबंधन और एनडीए) मंत्री बने। बांका जिले के अमरपुर से जेडीयू के टिकट पर पहली बार विधायक बने। अमरपुर के पूर्व विधायक जनार्दन मांझी के बेटे हैं और कुशवाहा समाज से आते हैं। जयंत के पिता की नीतीश कुमार से अच्छी बनती थी तो उनके कहने पर बेटे को टिकट मिल गई और फिर मंत्री भी बना दिए गए।

IAS कुमार रवि हैं भवन निर्माण विभाग के सचिव

वैसे, इस भवन निर्माण विभाग के सचिव IAS कुमार रवि हैं, जो अक्सर नीतीश कुमार के आसपास किसी न किसी कार्यक्रम में दिख जाते हैं। नीतीश सरकार में बड़ा पावरफुल माने जाते हैं। सुरेश प्रसाद प्रभाकर इंजीनियर इन चीफ के साथ-साथ अतिरिक्त कमिश्नर और विशेष सचिव हैं। संजय कुमार सिंह भी एक IAS हैं और इनके पास जॉइंट सेक्रेटरी के साथ चीफ विजिलेंस ऑफिसर की जिम्मेदारी है। इसके आलावा एक और IAS आशुतोष द्विवेदी हैं, जो जॉइंट सेक्रेटरी हैं।

रिटायरमेंट के एक महीने के भीतर दोबारा नियुक्त हुए तारणी

दरअसल, तारणी दास बिहार भवन निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता (उतर) हैं। वे 31 अक्टूबर 2024 को रिटायर हो गए थे। लेकिन भवन निर्माण विभाग ने उन्हें फिर से उसी पद पर दो साल के लिए नौकरी पर रख लिया। इतना ही नहीं, उन्हें निगम में मुख्य महाप्रबंधक का अतिरिक्त काम भी दे दिया गया। भवन निर्माण विभाग ने 29 नवंबर को एक सूचना जारी की थी, इसमें बताया गया था कि 19 नवंबर 2024 को राज्य मंत्रिपरिषद (नीतीश कैबिनेट) ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। मतलब, ठीक से एक महीने भी तारणी दास अपनी रिटायरमेंट को एनजॉए नहीं कर पाए। ये सब सेटिंग का ही तो कमाल है।

बिहार में ब्यूरोक्रेसी की मनमानी लेकर भी सियासी बयानबाजी

करीब 20 साल से बिहार की सत्ता पर नीतीश कुमार काबिज हैं। विपक्षी राजनेता कई बार नीतीश सरकार पर आरोप लगा चुके हैं कि बिहार में अफसरों का ‘महा जंगलराज’ है। बिना पैसा और बिना कमीशन का शायद ही कोई काम होता है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव तो ‘आरसीपी टैक्स’ के बाद अब ‘डीके टैक्स’ को लेकर खुलेआम मंच से आरोप लगाने शुरू कर दिए थे। हालांकि, सत्ता पर कोई फर्क नहीं पड़ता देख उन्होंने भी ‘डीके टैक्स’ की रट थोड़ी कम कर दी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आसपास रिटायर अफसरों की ‘खास’ टोली होती है, जिसका किसी भी फैसले में इनफ्लुएंस जरूर रहता होगा, ऐसा अनुमान है।

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