भाजपा के रणनीतिकार और गृह मंत्री अमित शाह राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर हमलावर क्यों हैं

पटना

बिहार की राजनीति में एनडीए ने कमोवेश सत्ता का सिरा वर्ष 2005 से 2025 तक थामा रहा। इस काल में सत्ता के वर्ष की गिनती जरूर बढ़ती रही, मगर चुनावी मुद्दा में कोई बदलाव नहीं आया। गौर करें, एनडीए के चुनावी पराक्रम पर जब कभी राष्ट्रीय जनता दल के विरुद्ध आवाज उठाई तो पहला शब्द ‘जंगल राज’ ही निकला। साथ ही, इसके याद हैं न पति-पत्नी का राज! वर्ष 2005 में भी चुनावी प्रचार में बतौर मुद्दा, सुशासन और विकास का स्थान जंगल राज के बाद आया। आज 20 साल बाद 2025 के दौरान भी चुनावी दंगल में उतरे अमित शाह का मुद्दा ‘जंगल राज’ ही बन कर उभरा। ऐसे में अमित शाह ने लालू यादव पर हमलावर होते क्या कहा? ये अहम हो जाता है।

लालू यादव का कार्यकाल जंगलराज था: अमित शाह

बिहार विधान सभा चुनाव की गरमाहट के बीच, बिहार आए केंद्रीय गृह मंत्री चुनावी जंग में ‘जंगल राज’ का तड़का लगा गए। अपने भाषण में साफ कहा कि 1990 से 2005 तक शासन काल ‘जंगल राज’ के नाम से जाना जाता था। इस कार्यकाल में अपराध, छिनतई, रेप की घटनाएं काफी होती थी। लालू यादव ने गरीबों के लिए कुछ नहीं किया। 1990 से 2005 तक लालू के कार्यकाल में अपराध का बोलबाला था। इसलिए लालू-राबड़ी की सरकार को ‘जंगल राज’ का नाम दिया गया। यही वजह था कि लालू-राबड़ी की सरकार में बिहार बर्बाद हुआ। लालू यादव से एक प्रश्न पूछता हूं कि आप यूपीए में मंत्री रहे, तब आपने केंद्र सरकार से कितना पैसा लिया? लालू-राबड़ी की सरकार में बिहार बर्बाद हुआ है।

एनडीए की सरकार में विकास हुआ: अमित शाह

राजद सुप्रीमो लालू यादव पर हमलावर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यही नहीं रुके। अब हमले के दूसरे पायदान पर विकास के सहारे राजद के शासनकाल पर निशाना भी खूब साधा। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार में बिहार का विकास हुआ है। पिछले 10 वर्ष में पीएम नरेंद्र मोदी ने 60 करोड़ गरीबों के लिए काम किया। मगर, यूपीए सरकार में अहम रोल निभाने वाले लालू यादव ने बिहार के गरीबों के लिए कुछ नहीं किया। पीएम मोदी ने गरीबों की मदद के लिए सहकारिता के क्षेत्र में काफी काम किया। सहकारिता क्षेत्र में हुए काम से सबसे ज्यादा फायदा बिहार को होने वाला है। आप नरेंद्र मोदी पर भरोसा कीजिए और बिहार में एनडीए की सरकार बना दीजिए। हम वादा करते हैं चीनी मिल फिर शुरू करेंगे। दलहन का एक एजेंडे एमएसपी पर खरीदा जा रहा है। 8000 करोड़ से पुलों का निर्माण हो रहा है। बिहार में मखाना बोर्ड बनाया गया है।

लालू यादव पर इतने हमलावर क्यों?

दरअसल, भाजपा के रणनीतिकार और गृह मंत्री अमित शाह राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर यूं ही नहीं हमलावर है। इस बार अमित शाह को लालू यादव का वो स्वरूप याद आ रहा है, जिन्होंने आरक्षण के रथ पर सवार हो कर भाजपा को आरक्षण विरोधी करार देकर उनके हाथों से जीत छीन ली थी। 2015 में लालू यादव को एक मुद्दा ‘आरक्षण’ मिला था। इस बार तो लालू यादव दो धारी तलवार भांज रहे हैं। लालू यादव वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को मुस्लिम विरोधी ठहराने लगे हैं और साथ ही 65 प्रतिशत आरक्षण को 9वीं अनुसूची में नहीं डालने को ‘आरक्षण चोर’ बताने लगे हैं।

बिहार चुनाव में जंगल राज क्यों?

आखिर ऐसा क्या है कि चुनावी जंग में राजद के विरुद्ध हो या महागठबंधन के विरुद्ध, एनडीए का पहला तीर ‘जंगल राज’ के नाम से क्यों छूटता रहा है? क्या वंशवाद, विकास और सुशासन जैसे मुद्दे पर भरोसा नहीं? अब तक के चुनावी जंग में हासिल मतों का किस्सा है कि जंगल राज के नाम पर लगभग 30 प्रतिशत वाली जाति वालों की गोलबंदी हो जाती है। इस नाम पर सवर्ण और वैश्य समेत ऐसी कई छोटी-छोटी जातियां जिनका जीवन व्यवसाय से चलता है, वे गोलबंद हो जाती है। तब भाजपा या एनडीए राजद के एमवाई यानी मुस्लिम और यादव के 32 प्रतिशत मत का जवाब बन कर सामने से लड़ती है। बाकी सुशासन, विकास और विकास के मुद्दे एनडीए के जीत का मार्ग प्रशस्त करती है। पिछले कुछ चुनाव में राजद के A टू Z का कमाल दिखा और सवर्ण मत में सेंधमारी भी राजद ने की। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के कई सवर्ण नेताओं को हार देखनी पड़ी। इनमें आरा से पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह, औरंगाबाद से पूर्व सांसद सुशील सिंह और बक्सर से मिथिलेश तिवारी को हार का सामना करना पड़ा। ये दीगर कि बेगूसराय से गिरिराज सिंह, मोतिहारी से राधामोहन सिंह, पटना साहिब से रवि शंकर प्रसाद और छपरा से राजीव प्रताप रूडी की जीत हुई थी।

नीतीश की जदयू रिलैक्स क्यों?

परिस्थितिवश, जनता दल (यू) कई कारणों से वर्ष 2020 में पिछड़ गई थी और विधान सभा में नंबर वन से नंबर तीन की पार्टी बन गई थी। लेकिन तब से रिकवर होते-होते लोकसभा चुनाव में मजबूत हो गई। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में जदयू का स्ट्राइक रेट भाजपा से कहीं ज्यादा था। अब तो जनता दल (यू) नीतीश कुमार के बीमारी की चर्चा के साथ निशांत कुमार का प्रोजेक्शन क्या हुआ, जदयू मजबूत होने लगी है। मिली जानकारी के अनुसार सरकार की एजेंसी की सर्वे रिपोर्ट है कि जनता दल (यू) वर्ष 2025 के विधान सभा चुनाव में 70 से 75 सीटें हासिल करेगी। ये स्थिति भाजपा के लिए खतरे की घंटी है।

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