आध्यात्मिक गुरु पंडित कमला पति त्रिपाठी
नवरात्रि, जो 22 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर तक चलेगी, के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना होती है। वे अपने भक्तों को सुरक्षा और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इस दिन का शुभ रंग रॉयल ब्लू है।

हिंदुओं के लिए नवरात्रि एक बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। देवी दुर्गा की पूजा करने के कई तरीके हैं। पूरे देश में भक्त इस पर्व को बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं। इस साल नवरात्रि का शुभ आरंभ 22 सितंबर से हुआ है और यह 2 अक्टूबर 2025 तक चलेगी। नवरात्रि का तीसरा दिन 24 सितंबर को, यानी शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (आश्विन माह) में मनाया जा रहा है।
जानिए नवरात्रि के तीसरे दिन का महत्व
नवरात्रि, जिसे शारदीय नवरात्रि भी कहते हैं, सितंबर-अक्टूबर के महीनों में मनाई जाती है। इन नौ दिनों और रातों में देवी दुर्गा की पूजा होती है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना की जाती है।
मां चंद्रघंटा, मां पार्वती का विवाहित रूप हैं, जिनके मस्तक पर अर्धचंद्र (घंटी के आकार का) सुशोभित रहता है। विवाह के बाद उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। वे अनुशासन और न्याय की स्थापना करती हैं। उनका वाहन सिंह है और उनका शरीर सुनहरे आभा से चमकता है।
मां चंद्रघंटा के तीन नेत्र और 10 भुजाएं हैं। उनके हाथों में कमल, कमंडल, जपमाला, त्रिशूल, तलवार, गदा, धनुष और बाण जैसे शस्त्र रहते हैं। वे सूर्यदेव की अधिष्ठात्री और मणिपुर चक्र की स्वामिनी मानी जाती हैं।जो लोग असुरक्षित या भयभीत महसूस करते हैं, उनके लिए मां चंद्रघंटा की पूजा विशेष लाभकारी मानी जाती है। वे अपने भक्तों को धन, सुख, सफलता और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद देती हैं। उनके माथे पर सुशोभित चंद्रघंटा की ध्वनि नकारात्मकता को दूर कर वातावरण को शुद्ध करती है। इस दिन का शुभ रंग रॉयल ब्लू है।
जानिए मां चंद्रघंटा मंत्र
पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यां चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
🌻👏🌻नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है, जो ज्ञान और तप की देवी हैं।
मंत्र:
मां चंद्रघंटा का बीज मंत्र है “ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः”।
चन्द् चंद्रघण्टा का ध्यान
पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते महयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।
वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
रंग, गदा, त्रिशूल,चापचर,पदम् कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥ मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। देवी भागवत पुराण के अनुसार, मां चंद्रघंटा का रूप अत्यंत शांत, सौम्य और ममतामयी है, जो अपने भक्तों को सुख-समृद्धि और शांति प्रदान करता है। इस दिन विशेष पूजा करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, जीवन में खुशहाली आती है और सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ती है। पूजा के फलस्वरूप, लोग आपको अधिक सम्मान देने लगते हैं। मां चंद्रघंटा का यह रूप विशेष रूप से सरल और शांति से परिपूर्ण है। वे अपने भक्तों की समृद्धि में वृद्धि करने के लिए प्रसिद्ध हैं। मां चंद्रघंटा की पूजा से न केवल भौतिक सुख में वृद्धि होती है, बल्कि समाज में आपका प्रभाव भी बढ़ता है।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत अलौकिक और भव्य माना जाता है। उनका रूप शांतिपूर्ण होने के साथ-साथ उनकी शक्ति भी अद्वितीय है, जो हर क्षेत्र में सफलता और समृद्धि प्रदान करती है। मां चंद्रघंटा की पूजा से जीवन के सभी पहलुओं में सफलता प्राप्त होती है। विशेष रूप से, इस दिन सूर्योदय से पहले पूजा करनी चाहिए, क्योंकि इस समय मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पूजा में लाल और पीले गेंदे के फूल चढ़ाने का महत्व है, क्योंकि ये फूल मां की ममता और शक्ति का प्रतीक हैं। मां चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्द्धचंद्र के आकार का घंटा स्थित है, जो उनकी महिमा और तेजस्विता को दर्शाता है। यही कारण है कि देवी का नाम चंद्रघंटा पड़ा।
मां चंद्रघंटा पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठे : सुबह जल्दी उठें और स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहने।
इसके बाद पूजा में मां को लाल और पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें ।
इसके बाद मां को कुमकुम और अक्षत अर्पित करें।
फिर मां चंद्रघंटा को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए पूजा में पीले रंग के फूलों और वस्त्रों का प्रयोग करें।
मां चंद्रघंटा को पीले अर्पित करें।
पूजा के दौरान मां के मंत्रों का जाप करें।
साथ ही दुर्गा सप्तशती और अंत में मां चंद्रघंटा की आरती का पाठ भी करें।
इन सभी विधियों को विधिपूर्वक करने से मां चंद्रघंटा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं।
मां चंद्रघंटा का प्रिय भोग
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा में खीर का भोग अर्पित करना सर्वोत्तम माना जाता है। मां को विशेष रूप से केसर की खीर बहुत पसंद है। इसके अतिरिक्त, आप लौंग, इलायची, पंचमेवा और दूध से बनी मिठाइयां भी मां को विशेष भोग के रूप गाय के दूध का भोग लगावे जिससे दुखों से मुक्ति प्राप्त होगी। 🌻👏🌻 🌻👏🌻









