बदलाव की शुरुआत स्वयं से ही : मुख्यमंत्री Samrat Choudhary “पैदल निकले… सत्ता नहीं, संदेश चला”

संतोष राज पाण्डेय,पटना


सम्राट चौधरी ने ‘नो व्हीकल डे’ पर पेश की सादगी और ऊर्जा बचत की मिसाल


बिहार की राजनीति में शुक्रवार की सुबह एक अलग तस्वीर देखने को मिली। आम दिनों की तरह लंबा काफिला, सायरन और सुरक्षा वाहनों की कतार नहीं थी। बल्कि मुख्यमंत्री शसम्राट चौधरी लोक सेवक आवास 1, अणे मार्ग से पैदल चलकर मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंचे।
यह सिर्फ पैदल यात्रा नहीं थी, बल्कि पेट्रोल-डीजल बचत, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार नागरिकता का एक मजबूत सार्वजनिक संदेश था। मुख्यमंत्री ने आज स्वयं ‘नो व्हीकल डे’ मनाकर यह संकेत दिया कि बदलाव की शुरुआत शीर्ष नेतृत्व से होनी चाहिए।
सादगी के जरिए बड़ा संदेश


मुख्यमंत्री बिना किसी तामझाम के कार्यालय पहुंचे और नियमित सरकारी कार्यों का निपटारा किया। इस दौरान उन्होंने राज्यवासियों से सप्ताह में कम-से-कम एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल की बचत और वाहनों के सीमित उपयोग की जो अपील की गई है, वह सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा विषय है।
मुख्यमंत्री की अपील के प्रमुख संदेश


सप्ताह में एक दिन वाहन छोड़ें
अगर संभव हो तो पैदल चलें, साइकिल या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें।
● ईंधन बचत ही राष्ट्र सेवा
पेट्रोल-डीजल की कम खपत से देश की ऊर्जा निर्भरता घटेगी।
● पर्यावरण संरक्षण की दिशा
कम वाहन मतलब कम प्रदूषण, स्वच्छ हवा और बेहतर स्वास्थ्य।
● नेतृत्व का व्यवहारिक संदेश
मुख्यमंत्री ने सिर्फ अपील नहीं की, बल्कि खुद सड़क पर उतरकर उदाहरण पेश किया।
राजनीति में प्रतीकात्मक कदमों का असर क्यों बड़ा होता है?


लोकतंत्र में जनता वही संदेश सबसे अधिक स्वीकार करती है जिसे नेता स्वयं अपने जीवन में लागू करते दिखाई दें। मुख्यमंत्री का पैदल सचिवालय जाना प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि “जनभागीदारी आधारित ऊर्जा अनुशासन” का संदेश माना जा रहा है।
आज जब शहरों में ट्रैफिक, प्रदूषण और ईंधन खर्च तेजी से बढ़ रहा है, तब इस तरह की पहलें सामाजिक अभियान का रूप ले सकती हैं।
जनता के लिए भी एक सरल संदेश


छोटी दूरी के लिए बाइक या कार जरूरी नहीं
सप्ताह में एक दिन वाहन मुक्त दिन अपनाया जा सकता है
इससे स्वास्थ्य, पर्यावरण और जेब—तीनों को लाभ होगा
बच्चे और युवा भी इस अभियान से जुड़ सकते हैं
एक तस्वीर, कई संदेश


मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह कदम सिर्फ प्रशासनिक खबर नहीं, बल्कि “सादगी, अनुशासन और ऊर्जा संरक्षण” का सार्वजनिक संदेश बन गया है। अगर सत्ता के शीर्ष पर बैठा व्यक्ति खुद पैदल चलकर उदाहरण प्रस्तुत करे, तो समाज में बदलाव की उम्मीद और मजबूत हो जाती है।
साथ में उनके चल रहे थे सचिव #IAS संजय सिंह जी। और साया की तरह साथ रहनेवाले धीर, गंभीर भाई शैलेंद्र ओझा जी भी थे। रास्ते में मिले लोगों का मुख्यमंत्री ने हाथ जोड़कर अभिवादन भी किया। गांधी जी ने कहा था, जो बदलाव आप दूसरों में देखना चाहते हैं, उसकी शुरुआत स्वयं से करें। अच्छी पहल है।

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