सोमवती अमावस्या कब है ? खास संयोग में करें ये उपाय

आध्यात्मिक गुरु पं कमला पति त्रिपाठी प्रमोद

सनातन धर्म में अमावस्या तिथि बहुत पावन होती है। अधिकमास में पड़ने वाले सोमवती अमावस्या बहुत विशेष मानी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस मास में पड़ने वाली अमावस्या तीन साल में एक बार आती है। अमावस्या की तिथि पितरों को समर्पित की गई है। मान्यता है कि इस तिथि पर पितर धरती पर आते हैं, इसलिए अमावस्या पर पितरों का तर्पण और पिंडदान किया जाता है। मान्यता है कि इन कामों से पितर प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं।


अमावस्या पर स्नान-दान, पूजा-पाठ, जप, तप आदि से विशेष पुण्य प्राप्त होते हैं। अमावस्या तिथि जब सोमवार को पड़ती है, तो उसको सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इन दिनों अधिकमास चल रहा है। इसलिए इस साल अधिकमास और सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है इस साल ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या 15 जून को मनाई जाएगी इस दिन सोमवार है। इसलिए ये सोमवती अमावस्या रहेगी।
15 जून को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या एक अत्यंत दुर्लभ और महासंयोग है। यह तिथि लगभग 30 वर्षों बाद ‘ज्येष्ठ अधिकमास’ में सोमवार के दिन पड़ रही है। इस दिन ‘अमृत सिद्धि’ और ‘सर्वार्थ सिद्धि’ जैसे दुर्लभ योग भी बन रहे हैं। सोमवती अमावस्या महाभारत काल में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को इस अमावस्या का महत्व बताते हुए कहा था कि पवित्र नदियों में स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। पितृ तृप्ति और मोक्ष यह तिथि पितरों को समर्पित होती है। इस दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान कर, काले तिल से तर्पण और दान-पुण्य करने से पितृ दोष शांत होता है और पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।सौभाग्य और अखंडता विवाहित स्त्रियों के लिए इस व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन सुहागिनें पीपल के वृक्ष की परिक्रमा कर अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। शिव-शक्ति की आराधना सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है और अमावस्या तिथि माता पार्वती व शिवजी की पूजा के लिए उत्तम मानी जाती है। इस दुर्लभ संयोग में शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करने से वैवाहिक बाधाएं दूर होती है।

सोमवती अमावस्या के दिन करें उपाय
अमावस्या पर गेहूं के आटे में चीनी मिलाकर चींटियों को खिलाएं। मान्यता है कि ऐसा करने से धन की परेशानियां दूर होती हैं।
इस दिन शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं। मान्यता है कि इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
घर के उत्तर-पूर्व दिशा में काले धागे की बत्ती डालकर घी का दीपक जलाएं। इसमें थोड़ा सा केसर डालें। ऐसा करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है।
स्नान के बाद पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करें और उसकी परिक्रमा करें। ऐसा करने से आर्थिक तंगी दूर होती है।
सफेद मिठाई, तिल, वस्त्र, अन्न और जरूरतमंदों को जूते-चप्पल का दान करें. इससे विशेष लाभ मिलते हैं।
पितृ दोष और बाधा निवारण उपायतर्पण: इस दिन सुबह पवित्र नदियों (या घर में गंगाजल मिले जल) में स्नान करने के बाद, तांबे के पात्र में जल, दूध, शहद और काले तिल मिलाकर ॐ पितृ देवताभ्यो नमः का जाप करते हुए पितरों को तर्पण अर्पित करें।दान: जरूरतमंदों को अपनी क्षमतानुसार अन्न, छाता, वस्त्र या काले तिल का दान करें। इसके अलावा चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं।धूप देना: अमावस्या की शाम को गोमूत्र/गोबर के उपले या कपूर के साथ गूगल, पीली सरसों और काले तिल को मिलाकर पूरे घर में घुमाएं और दक्षिण दिशा में रख दें, इससे नकारात्मकता और पितृ बाधा दूर होती है।2. सुख-सौभाग्य और मनोकामना पूर्ति उपायपीपल वृक्ष की पूजा सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की परिक्रमा करना अत्यंत फलदायी है। पीपल की जड़ में जल अर्पित करके ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें और सूत के धागे से पीपल की 108 बार परिक्रमा करें।शिव पूजा: भगवान शिव का कच्चे दूध और गंगा जल से अभिषेक करें और महामृत्युंजय मंत्र या ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।3. पुरुषोत्तम मास के विशेष अनुष्ठानमंत्र जाप: इस दिव्य मास में भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। श्रीमद्भगवत पाठ पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत या गीता का पाठ करें या सुयोग्य आचार्य से करवाएं तो उनका अनंत कोटी लाभ आपको प्राप्त होगा और आप उस पुण्य से जन्मों जन्मों के पाप को नष्ट कर सुख,समृद्धि और ऐश्वर्य के साथ अनंत काल तक जीवन यापन करेगें।
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