वो दिन कितने अच्छे थे
✒️ निरंजन ✒️
भाजपा ने पूरा देश बर्बाद कर दिया है, लोगों से जिंदगी जीने का सारा मजा छीन लिया है। इस सरकार को बदलने का टाइम आ गया है, अच्छे दिन कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। हमें तो पुराने दिन चाहिए, जब महीने में दो-तीन बार बम-विस्फोट होते थे, सौ-दो सौ लोगों के मारे जाने की खुशखबरी मिलती थी। जगह-जगह मन्दिरों पर हमले होते थे। वो दिन भी क्या दिन थे, जब पूरी मुंबई को आतंकवादी तीन दिन तक बंधक बनाकर बैठ गए थे। पहलगाम और पुलवामा से मजा नहीं आ रहा है। हमें तो मुम्बई सीरियल ब्लास्ट वाले दिन चाहिए। एक पहलगाम के कारण मोदी सरकार ने पाकिस्तान में तबाही मचा दी, ये सरकार की तानाशाही है, उसका पानी तक रोक दिया, बेचारा प्यासा मर रहा है और पूरी दुनिया से पानी छोड़ने की अपील कर रहा है। तब बढ़िया था, बड़े-बड़े हमले होते थे, पाकिस्तान से दोस्ती भी चल रही थी, हम उसे हर महीने डोजियर भेज कर खुश रहते थे।
वो दिन कितने अच्छे थे जब भारत के प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के जिया ul haq को ये खबर दिया कि आपके परमाणु कार्यक्रम का पता हमने लगा लिया है हमारे RAW के एजेंट आपके यहाँ है और 200 एजेंट को पाकिस्तान में मारा गया वो दिन कितने अच्छे थे ईरान में भारत का राजदूत ने भारत के सारे RAW के आदमी को मरवा दिया बाद में उस महान आदमी को देश का उप राष्ट्रपति बनाया गया, वो दिन कितने अच्छे थे।
बिजली आती नहीं थी, जब आती थी तो कितनी खुशी होती थी, अब जाती नहीं है तो आने की खुशी भी चली गयी। तब बढ़िया था, जब देश नेहरू जी का एक एम्स था, वो राजकुमारी कौर जी के सौजन्य से, चार-पांच आईआईटी और आईआईएम थे, अब मोदी जी ने दो-दो दर्जन एम्स, आईआईटी और आईआईएम खोल दिए हैं, इतनी भीड़ क्यों बढ़ा दी गयी है। मेडिकल सीटें तीन गुना कर दी, बेचारे बच्चे विदेश जा रहे हैं, तब पचास हजार सीटें थी तो बच्चे खुश थे। बिना परीक्षा के सीटें बेच दी जाती थी, अब पेपर होने लगा है, अगर पेपर न होते तो पेपर लीक की समस्या भी नहीं होती।
वो दिन कितने अच्छे थे जब पटना में एक खास छात्रावास में मेडिकल का प्रश्न पत्र आउट होता था आराम से कुछ हजार में मिल जाते थे। मेडिकल में दाखिला कितना आसान था आज तो ये NEET का चक्कर। वो दिन कितने अच्छे थे जब बिहार ( झारखंड) में 6 मेडिकल कॉलेज सरकारी हुआ कर्ता था और आज सिर्फ बिहार में 12 हो गए है। बीजेपी सरकार ठीक नहीं है।वो सरकार ही ठीक थी जब राज्यपाल बूटा सिंह का बेटा मेडिकल का सीट बेचा कर्ता था राज्यपाल के पास मेडिकल का कोटा होता था मुख्यमंत्री के पास कोटा होता था वो दिन कितने अच्छे थे जब लालू प्रसाद यादव अपने nalayak बच्चों को MGM मेडिकल कॉलेज जमशेदपुर में डायरेक्ट अपने कोटे से एडमिशन करवाते थे, वो दिन कितने अच्छे थे, ये बीजेपी सरकार सब कोटा ही खत्म कर दिया।
इस सरकार का क्या फायदा जो डिफेंस इक्विपमेंट्स देश में ही बनाने लगी है, अब इन्हें खरीदने से मिलने वाली कमीशन भी कम होती जा रही है। बेकार में बच्चों को रोजगार दिया जा रहा है और देश का पैसा बचाया जा रहा है। तब बढ़िया था, जब तीन सौ में पांच जीबी डाटा मिलता था और कॉल रिसीव के भी पैसे लगते थे, अब फालतू में 300 में रोज का 2 जीबी डाटा दिया जा रहा है। कितना बढ़िया था, दो लेन के हाईवे थे, मालगाड़ी 20 की औसत गति से चलती थी, अब उसे 70 की गति से चलाया जा रहा है,
छोटी लाइन थी कोयले वाली इंजन कि छुक छुक कि आवाज कितना अच्छा था कई घंटों में दरभंगा से निर्मली पहुचते थे आज सब बदल गया इलेक्ट्रिक वाली इंजन आ गया बड़ी लाइन वो भी डबल हो गया है सारा मजा ही खराब कर दिया बीजेपी सरकार ने।
दस-दस लेन के हाईवे बनाये जा रहे हैं। मोदी सरकार भी पूरी बोर सरकार है, पहले बढ़िया था, जब लाखों करोड़ के घोटालों की खबर चलती रहती थी। 2G , 4G कोल ऐसे घोटाले होते थे एक मुर्गी एक साल में 4 करोड़ की चारा खा जाती थी स्कूटर पर 10 भैस को एक बार में रांची से जमशेदपुर भेजा जाता था वो कितने अच्छे दिन थे। 30 km का सफर 4 घंटा में पूरा होता था कमर का exercise हो जाता था आज तो 30 मिनट लगते कमर हिलता भी नहीं, वो दिन कितने अच्छे थे। Forbisganj से पटना जाने में पूरा दो दिन लगता था आज कुछ घंटों में पहुच जाते है फिर पटना में बोर होते हैं वो दिन कितने अच्छे थे किरासन तेल लेने के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ता था आज किरासन मिल नहीं रहा कमबख्त बिजली आ गई मेरा लालटेन को जंग खा गया, वो दिन कितने अच्छे थे जब मोटरबाइक कि आवाज सुन कर दौर पड़ते थे देखने कि कौन साहब आया है आज हर घर में मोटरबाइक है मजा ही खराब कर दिया। ये बीजेपी सरकार सब मजा खराब कर दिया वो दिन कितने अच्छे थे जब सड़क नहीं थी आराम से बैल गाड़ी में बैठ कर सफर करते थे आज मजा ही खराब कर दिया सड़क बना कर अब गाड़ी में बैठना पड़ता है।
बढ़िया था, जब नक्सलवादी हमारे जवानों को घेर-घेर कर मारते थे, अब तो मोदी सरकार ने बेचारे नक्सलियों का ही खात्मा कर दिया। बेकार में नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास करना पड़ रहा है। अब बसों और ट्रेनों में सफर का मजा ही नहीं रहा है, आराम से मंजिल तक चले जाते हैं और कोई खुशी भी नहीं होती, तब कितना बढ़िया था, जब पता नहीं होता था कि जिंदा पहुँच पाएंगे भी या नहीं, जेन जी को तो पता ही नहीं हैं कि हमने कितने मजे किये हैं, बम फटने के मजा इन्होंने लिया ही नहीं है। इन्हें क्या पता कि एक टेलीफोन कनेक्शन और गैस कनेक्शन के लिए भी मंत्रियों के चक्कर काटने पड़ते थे। इन्हें पता ही नहीं है कि बीस-बीस साल तक लोगों को कनेक्शन नही मिलता था। इन्हें क्या पता कि सीमेंट भी कोटे से मिलता था। देश में हर जगह लाइन में लोग लगे रहते थे, इससे लोगों में संवाद बना रहता था। नौकरी लेने के लिए मेहनत करने की जरूरत नहीं थी, हर मंत्री का कोटा फिक्स था, उसके पीए को पैसे पकड़ाए और नौकरी मिल जाती थी । मंत्री जी बैठकर नौकरी बांट देते थे, सब खुश रहते थे अब बच्चे दिन रात मेहनत करते हैं तब जाकर कहीं नौकरी मिलती है ।
कांग्रेस को वापस आना ही चाहिए, बेकार में हम लोग हर जगह जल्दी पहुंच जाते हैं और वहां बोर होते हैं…कितना अच्छा था सिर्फ पैसे वाले ही हवाई सफर करते थे राज्य में एक ही एयरपोर्ट था और आज कई एयरपोर्ट बना दिया हर जगह हवाई सेवा सुरु कि गई अब ये मामूली लोग भी हवाई जहाज में सफर कर रहे हैं। वो दिन ही अच्छा था जब हम एयर टिकट लोगों को शान से दिखाते थे और गर्व महसूस करते थे आज तो सब के पास एयर टिकट है। अब मेरा क्या—







