सावन में शिव की भक्ति से सारे मनोकामना होते है पूर्ण

🌻🪷🌻आध्यात्मिक गुरु पं कमला पति त्रिपाठी प्रमोद 🌻🪷🌻
कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि जब सोमवार को पड़े पौराणिक महत्व, आध्यात्मिक रहस्य एवं पूजन का विस्तृत फल
श्रावण मास भगवान शिव का अत्यंत प्रिय मास माना गया है। इस मास का प्रत्येक दिन शिव आराधना के लिए शुभ होता है, किंतु जब श्रावण कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि सोमवार के दिन आती है, तब यह संयोग अत्यंत दुर्लभ और विशेष पुण्यदायक माना जाता है। सोमवार स्वयं भगवान शिव का दिन है, जबकि पंचमी तिथि शिव परिवार से जुड़ी मानी जाती है। इस कारण यह योग शिव कृपा तथा पितृ-आशीर्वाद का विशेष अवसर प्रदान करता है।

पौराणिक महत्व
शिवपुराण, स्कन्दपुराण तथा अन्य सनातन परंपराओं के अनुसार श्रावण मास में देवाधिदेव महादेव पृथ्वी पर भक्तों की प्रार्थना शीघ्र स्वीकार करते हैं। समुद्र मंथन के समय जब भगवान शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए हलाहल विष का पान किया, तब देवताओं ने श्रावण मास में गंगाजल से उनका अभिषेक कर उन्हें शीतलता प्रदान की। तभी से श्रावण मास में जलाभिषेक और रुद्राभिषेक की परंपरा चली आ रही है।
पंचमी तिथि नागदेवता की तिथि मानी जाती है। भगवान शिव अपने गले में वासुकि नाग धारण करते हैं। इसलिए इस दिन शिव एवं नागदेवता दोनों की पूजा करने से कालसर्प दोष, सर्पदोष, भय तथा ग्रहजनित कष्टों की शांति का विशेष महत्व बताया गया है।
प्रथम सोमवार का आध्यात्मिक महत्व
श्रावण का प्रथम सोमवार पूरे मास की साधना का प्रारंभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा, संयम और भक्ति से की गई शिव उपासना पूरे श्रावण मास की पूजा का विशेष फल प्रदान करती है। इस दिन किया गया संकल्प वर्षभर साधक के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति तथा शुभ फल देने वाला माना जाता है।
पूजन विधि
प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर भगवान शिव, माता पार्वती, श्रीगणेश तथा नंदी का ध्यान करें।
इसके बाद श्रद्धापूर्वक
गंगाजल एवं शुद्ध जल से अभिषेक करें।
दूध, दही, घी, शहद एवं शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।
बेलपत्र, धतूरा, आक का पुष्प, भस्म एवं चंदन अर्पित करें।
मंत्र “ॐ नमः शिवाय” तथा महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
शिव चालीसा, रुद्राष्टकम या शिवमहिम्न स्तोत्र का पाठ करें।
नागदेवता को दूध अर्पित करने के स्थान पर उनकी प्रतिमा या चित्र पर हल्दी, कुश एवं पुष्प अर्पित करें।
इस दिन पूजन करने का फल
इस दिव्य संयोग में श्रद्धापूर्वक पूजा करने से
भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मानसिक तनाव एवं भय दूर होते हैं।
परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बढ़ती है।
रोग, शोक और नकारात्मकता का क्षय होता है।
दांपत्य जीवन में मधुरता आती है।
संतान प्राप्ति एवं संतान के मंगल की कामना पूर्ण होने की मान्यता है।
ग्रहदोष, विशेषकर राहु-केतु एवं कालसर्प संबंधी कष्टों की शांति के लिए यह दिन शुभ माना जाता है।
व्यापार, नौकरी तथा आजीविका में उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते हैं।
साधक की आध्यात्मिक उन्नति एवं शिवभक्ति में वृद्धि होती है।
विशेष दान
इस दिन यथाशक्ति अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, फल तथा गौ-सेवा का संकल्प लेने से पुण्य में वृद्धि होती है। किसी जरूरतमंद को भोजन कराना और शिव मंदिर में दीपदान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
श्रावण कृष्ण पक्ष की पंचमी जब सोमवार को आती है, तब यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि शिवभक्ति, आत्मशुद्धि और लोककल्याण का अत्यंत शुभ अवसर मानी जाती है। इस दिन श्रद्धा, संयम और निष्काम भाव से भगवान शिव का पूजन करने वाला साधक आध्यात्मिक शांति, पारिवारिक सुख, आरोग्य तथा समृद्धि का अधिकारी बनता है। भगवान भोलेनाथ की कृपा से जीवन की अनेक बाधाएँ दूर होकर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

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