संतोष राज पाण्डेय
कुछ लोग शहर में रहते हैं, और कुछ लोग शहर को अपने अंदर बसा लेते हैं। स्वर्गीय रघुनाथ पांडेय दूसरी मिट्टी के बने थे। मुजफ्फरपुर उन्हें आज भी ‘नगर पिता’ और ‘विकास पुरुष’ कहता है, तो उसके पीछे सिर्फ पद नहीं, एक पूरा जीवन दर्शन है।

बखरी गांव से शुरू हुआ संघर्ष
8 मार्च 1922… मुजफ्फरपुर के बखरी गांव में एक साधारण परिवार में जन्म। बचपन कठिनाइयों में बीता, लेकिन यही कठिनाइयां उनकी पाठशाला बनीं। आत्मनिर्भरता और समाज सेवा का जो संकल्प उन्होंने तब लिया, वो अंतिम सांस तक निभाया।
उच्च शिक्षा के लिए मुजफ्फरपुर आए तो किताबों के साथ-साथ देश की आजादी की लड़ाई से भी जुड़ गए। स्वतंत्रता संग्राम ने उन्हें नेता नहीं, सेवक बनना सिखाया।
10 साल – साइकिल से शहर का दौरा
वे 10 साल तक मुजफ्फरपुर नगरपालिका (आज का नगर निगम) के अध्यक्ष रहे। लेकिन उनका अंदाज सबसे अलग था।
वो साइकिल से पूरे शहर का भ्रमण करते। गली-गली रुकते, आम आदमी की समस्या सुनते और वहीं समाधान करते। आज की राजनीति में जहां नेता काफिले के बिना नहीं निकलते, वहां रघुनाथ बाबू की साइकिल ही उनका काफिला थी। उनके नेतृत्व में बनी सड़कें आज भी उनकी याद दिलाती हैं।
उनके व्यवसाय – बस सेवा में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों के परिवारों की सुधि वे खुद लेते थे। मालिक होते हुए भी मजदूर के पिता जैसे थे।
मुजफ्फरपुर को बनाया ‘शिक्षा का हब’
अगर आज मुजफ्फरपुर उत्तर बिहार की शैक्षणिक राजधानी है, तो इसका श्रेय एक ही नाम को जाता है।
उन्होंने खड़े किए वो संस्थान जो आज हजारों युवाओं का भविष्य गढ़ रहे हैं:
- श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH)
- होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल
- रघुनाथ पांडेय मेमोरियल लॉ कॉलेज
- वैशाली इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट
- विद्या विहार हाई स्कूल और उमा पांडेय कॉलेज, पूसा
सोचिए, एक व्यक्ति ने एक शहर को डॉक्टर, वकील, प्रबंधक देने की फैक्ट्री लगा दी।
राजनीति में सिद्धांत के सिपाही
1980 से 1995 तक कांग्रेस के टिकट पर मुजफ्फरपुर के नगर विधायक रहे। बिहार सरकार में मंत्री बने। लेकिन वे कांग्रेस के एकनिष्ठ सिपाही रहे – सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।
पद आया और गया, लेकिन जनता का विश्वास कभी नहीं टूटा।
24 सितंबर 2001 – एक युग का अंत
उस दिन मुजफ्फरपुर ने सिर्फ एक नेता नहीं खोया, अपना पिता खोया। लेकिन ‘नगर पिता’ कभी मरते नहीं। वो SKMCH के हर डॉक्टर में जिंदा हैं, लॉ कॉलेज के हर वकील में जिंदा हैं, और उस हर सड़क पर जिंदा हैं जो उन्होंने बनवाई थी।
पुण्यतिथि पर शत-शत नमन।
रघुनाथ पांडेय अमर रहें!







