मोतिहारी जिले के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार,DEO पर लटकी तलवार

मोतिहारी

मोतिहारी जिले के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जिसमें बेंच-डेस्क, समरसेबल बोरिंग, बूथ रिपेयरिंग जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में अनियमितताएँ हुई हैं। यह मामला तत्कालीन और वर्तमान जिला शिक्षा पदाधिकारी के लिए परेशानी का सबब बन गया है। वर्तमान डीईओ पर भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है, जबकि तत्कालीन डीईओ, जो वर्तमान में पटना में कार्यरत हैं, पर भी भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच की तलवार लटक रही है।मोतिहारी के तत्कालीन डीईओ संजय कुमार पर बिना बेंच-डेस्क आपूर्ति, बिना समरसेबल बोरिंग और बिना मतदान केंद्र रिपेयरिंग के ठेकेदार बनकर राशि का भुगतान करने और गबन करने का आरोप लगा है। शिक्षा मंत्री के निजी सचिव ने  मोतिहारी के जिलाधिकारी को इस मामले की जाँच तीन सप्ताह में पूरी कर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया  है। भ्रष्टाचार के इन मामलों को लेकर मोतिहारी के तत्कालीन और पटना के वर्तमान डीईओ चर्चा में हैं। शिक्षा मंत्री और मोतिहारी के प्रभारी मंत्री के निजी सचिव के पत्र के बाद शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है।

बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के निजी सचिव इश्तेयाक अजमल ने पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। 4 फरवरी 2024 को लिखे इस पत्र में शिक्षा मंत्री और प्रभारी मंत्री के 21 जुलाई 2024 के पत्र का उल्लेख किया गया है। शिक्षा मंत्री के निजी सचिव ने मंत्री के निर्देश पर यह पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि 7 जुलाई 2024 को पूर्वी चंपारण में हुई समीक्षा बैठक में कई विधायकों ने शिक्षा से संबंधित मुद्दे उठाए थे। इस बैठक के मुद्दे संख्या 22 में पूर्वी चंपारण के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा है कि ढाका विधानसभा सहित सभी प्रखंडों के प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में बेंच-डेस्क आपूर्ति, विद्यालय मरम्मत, मतदान केंद्रों का रखरखाव, समरसेबल लगाने, खेलकूद, किचन सेट, चाहरदीवारी और भवन निर्माण के कार्यों में बिना टेंडर के ही तकनीकी कर्मियों और अधिकारियों की मिलीभगत से राशि निकाली गई है। सैकड़ों विद्यालयों के लिए वेंडर को भुगतान कर दिया गया है, लेकिन बेंच-डेस्क विद्यालयों को नहीं दिए गए हैं। तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार खुद ठेकेदार बन गए थे, और उन्होंने प्रत्येक विद्यालय में 2400 रुपये की कुर्सी-बेंच की आपूर्ति के लिए 5000 रुपये का भुगतान किया।

शिक्षा मंत्री ने पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी को भेजे पत्र में कहा है कि इन आरोपों की जाँच के लिए पूर्वी चंपारण के उप विकास आयुक्त को निर्देशित किया गया था। उप विकास आयुक्त द्वारा भेजी गई जाँच रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान जिला शिक्षा पदाधिकारी संजीव कुमार के खिलाफ विभागीय आरोप गठित किए गए हैं। हालाँकि, तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार, जिनके कार्यकाल में विधायकों ने गंभीर आरोप लगाए थे, उनकी जाँच रिपोर्ट में कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए, शिक्षा मंत्री ने तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जाँच तीन सप्ताह के भीतर उप विकास आयुक्त से कराकर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

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