सिर्फ स्कूल भेज देने से अभिभावकों की ड्यूटी खत्म नहीं होती : मिथिलेश तिवारी

अभिभावकों से सीधी बात में बोले-बच्चों की पढ़ाई और सीखने की प्रक्रिया में नियमित सहभागी बनें

प्रदर्शनी का किया अवलोकन, बच्चों की कलाकृतियों को सराहा

पटना। शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी ने अभिभावकों से कहा कि सिर्फ बच्चों को स्कूल भेज देने से आपकी ड्यूटी खत्म नहीं हो जाती। बच्चों की सीखने की प्रक्रिया में अभिभावकों की नियमित भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि अभिभावक बच्चों की पढ़ाई पर नजर रखें, उनसे संवाद करें और उनकी समस्याओं को समझें। स्कूल और परिवार के बीच बेहतर तालमेल से ही बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है।

शनिवार को दानापुर के रामजीचक स्थित राजकीय मध्य विद्यालय में ‘मेरे सपनों का भारत : सेवा चित्र’ राज्यव्यापी अभियान और अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी के बाद शिक्षा मंत्री ने विद्यालय पहुंचे अभिभावकों से सीधी बात की। उन्होंने एक-एक कर उनकी समस्याओं को जाना और समाधान का भरोसा दिया।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि अभिभावक बच्चों की पढ़ाई को स्कूल की जिम्मेदारी न समझें। घर में भी बच्चों के सीखने के लिए सकारात्मक माहौल बनाएं। बच्चों से उनकी पढ़ाई के बारे में बात करें और किसी तरह की परेशानी होने पर शिक्षकों से संवाद करें।
शिक्षा मंत्री ने विद्यालय में लगी ‘मेरे सपनों का भारत : सेवा चित्र’ प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं द्वारा बनाई गई विभिन्न कलाकृतियों को देखा और उनकी रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों की कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता और आत्मविश्वास को मजबूत करती हैं।
कार्यक्रम के दौरान श्री तिवारी ने बच्चियों के साथ ग्रुप फोटो भी खिंचवाई। इस दौरान विद्यालय के शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

Related Posts

शिक्षा को अंत्योदय तक पहुंचाने का संकल्प लें: मिथिलेश तिवारी

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों से प्रेरणा लेकर की सामाजिक जीवन की शुरुआत, एकात्म मानववाद है सामाजिक जीवन का मूल मंत्र पटना/समस्तीपुर, 25 सितंबर (STAR INDIA NOW) – शिक्षा मंत्री…

रघुनाथ पांडेय : साइकिल वाला नगर पिता, जिसने मुजफ्फरपुर की तकदीर लिख दी

संतोष राज पाण्डेय कुछ लोग शहर में रहते हैं, और कुछ लोग शहर को अपने अंदर बसा लेते हैं। स्वर्गीय रघुनाथ पांडेय दूसरी मिट्टी के बने थे। मुजफ्फरपुर उन्हें आज…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *